APP समष्टि MCQ व्यष्टि 11Q.B APP DOWNLOAD करें

12वी व्यष्टि अर्थशास्त्र PDF प्रश्न उत्तर MICRO ECONOMICS IN HINDI

12वी व्यष्टि अर्थशास्त्र PDF प्रश्न उत्तर MICRO ECONOMICS IN HINDI 

सूक्ष्म अर्थशास्त्र PDF प्रश्न उत्तर 


UNIT – 1 व्यष्टि अर्थशास्त्र का परिचय

Q.1 व्यष्टि अर्थशास्त्र किसे कहते हैं?

उत्तर - व्यष्टि अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र की वह शाखा जो अर्थव्यवस्था के छोटे भागो एवं व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयों जैसे एक उपभोक्ता एक उत्पादक एक परिवार एक फर्म एक उद्योग आदि का आर्थिक अध्ययन करती है व्यष्टि अर्थशास्त्र कहलाती है।

Q.2 आर्थिक समस्या क्या है?

उत्तर -प्रत्येक मनुष्य या राष्ट्र के पास साधन सीमित होते हैं , किंतु आवश्यकताएं असीमित है । और इन सीमित साधनों से ही अपनी आवश्यकताओं को पूरा करना होता है। इसमें आर्थिक समस्या उत्पन्न होती है कि इन सीमित साधनों से कौनसी आवश्यकता को कितनी प्राथमिकता दी जाए और उसे पूरा किया जाए । जिसे आर्थिक समस्या कहते हैं।

Q.3 आर्थिक समस्या क्यों उत्पन्न होती है ?

आर्थिक समस्या उत्पन्न होने के कारण बताइए।

उत्तर - विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सीमित साधनों के प्रयोग से उत्पन्न  चयन की समस्या को ही आर्थिक समस्या कहते हैं।                 

आर्थिक समस्या उत्पन्न होने के कारण

✍️1.असीमित आवश्यकता है ।

✍️2.आवश्यकताओं की तीव्रता में अंतर।

✍️3. आवश्यकता की पूर्ति के साधन सीमित हैं ।

✍️4.साधनों का वैकल्पिक प्रयोग ।

✍️5.चयन के चुनाव की समस्या।

Q.4 अवसर लागत क्या है ?

 उत्तर परिभाषा - प्रोफेसर कॉल के अनुसार :- "एक कार्य के चयन द्वारा विकल्प अवसर के त्याग का मूल्य कार्य विशेष की विकल्प को लागत या अवसर लागत है।"

अवसर लागत का अर्थ - ✍️किसी साधन की अवसर

लागत से अभिप्राय उसके दूसरे सर्वश्रेष्ठ विकल्प मूल्य

 के त्याग से हैं।

Q.5 अर्थव्यवस्था किसे कहते हैं? अर्थव्यवस्था कितने प्रकार की होती है।

उत्तर - अर्थव्यवस्था का अर्थ- अर्थव्यवस्था किसी भी देश की आर्थिक प्रणाली है जो उस देश के आर्थिक क्रियाओं के संचालन को बताती है प्रत्येक अर्थव्यवस्था किसी न किसी आर्थिक प्रणाली पर आधारित होती है। किसी देश में समस्त आर्थिक क्रियाओं का परिपथ अर्थव्यवस्था कहलाता है।

अर्थव्यवस्था के प्रकार 1.  पूंजीवादी अर्थव्यवस्था

2.  समाजवादी अर्थव्यवस्था  

3.मिश्रित अर्थव्यवस्था

Q.6 आदर्श आर्थिक विश्लेषण से आपका क्या अभिप्राय है।

उत्तर-आदर्श आर्थिक विश्लेषण पहलुओं पर क्या होना चाहिए "what ought to be" पर आधारित है । आदर्श आर्थिक विश्लेषण में तथ्यों के विश्लेषण में वांछनीय अवांछित नियम को ध्यान में रखकर आदर्श विश्लेषण को अपनाने पर जोर दिया जाता है।

Q.7 सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण से आपका क्या अभिप्राय है

 उत्तर-कारात्मक या वास्तविक आर्थिक विश्लेषण

आर्थिक समस्याओं का "कारण" और "परिणाम" के संबंध में विश्लेषण करता है।  वह आर्थिक विश्लेषण में क्या है  What is” को बताता है क्या होना चाहिए what ought to be की बात नहीं करता।

Q.8 सीमांत उत्पादन संभावना क्या है ?

उत्तर- सीमांत उत्पादन संभावना एक साधन की अवसर लागत पर निर्भर करती है। एक उत्पादन संभावना वक्र दो वस्तुओं के उन सभी संयोगों को बताता है जिनका अधिकतम उत्पादन एक अर्थव्यवस्था के लिए संभव है, जब कि संसाधनों की मात्रा स्थिर है एवं उनका पूर्ण प्रयोग हो रहा है तथा उत्पादन की तकनीक की स्थिति

 दी हुई है।

सेम्युलसन:- "एक उत्पादन संम्भावना वक्र चुनावों की सूची को बताता है।"

Q.9 उत्पादन संभावना वक्र क्या है? उत्पादन संभावना वक्र की परिभाषा लिखिए

ANS. अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों की सीमित मात्रा होती है किंतु उत्पादित की जाने वाली वस्तुएं असीमित होती है फलस्वरुप अर्थव्यवस्था को साधनों के वैकल्पिक उपयोगों के बीच चयन करना पड़ता है।

इस प्रकार वस्तुओं के उत्पादन के अनेक विकल्प अर्थव्यवस्था के सामने आते हैं जिन्हें अर्थव्यवस्था की उत्पादन संभावनाएं कहते हैं यदि इन उत्पादन संभावनाओं को रेखा चित्र द्वारा दर्शाया जाता है तो वह उत्पादन संभावना वक्र कहलाती है।

सेम्युलसन के अनुसार :"उत्पादन संभावना वक्र वह वक्र है जो दो वस्तुओं या सेवाओं के उन सभी सहयोग दें को प्रकट करती हैं जिनका अधिकतम उत्पादन अर्थव्यवस्था के दिए हुए साधनों का तकनीक के द्वारा साधनों के पूर्ण रोजगार की सूची में संभव होता है।"

Q.10 बाजार अर्थव्यवस्था को समझाइये

उत्तर- बाजार अर्थव्यवस्था वह प्रणाली है जिसमें उत्पादन के साधनों पर व्यक्तिगत अधिकार होता है। इसे बाजार व्यवस्था के नाम से जाना जाता है । इस का उद्भव 16वी शताब्दी में इंग्लैंड की औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप हुआ था बाजार अर्थव्यवस्था निश्चित प्रणाली के रूप में किसी भी देश में प्रचलित नहीं रहा ।समय परिस्थिति के अनुसार इस में परिवर्तन होते रहे। वर्तमान में बाजार अर्थव्यवस्था अपने मूल स्वरूप में किसी भी देश में नहीं पाया जाता। बाजार अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों पर व्यक्ति विशेष का अधिकार होता है प्रत्येक व्यक्ति अपने लाभ को अधिकतम करने के लिए इन साधनों का अपनी इच्छा अनुसार प्रयोग करता है इसलिए बाजार अर्थव्यवस्था या पूंजीवाद को स्वतंत्र अर्थव्यवस्था भी कहा जाता है। इस अर्थव्यवस्था के अंतर्गत आर्थिक कार्य में राज्य के हस्तक्षेप को अनावश्यक माना गया है।

Q.11 केन्द्रीयकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था को समझाइये ।

उत्तर - केंद्रीयकृत अर्थव्यवस्था का प्रादुर्भाव पूंजीवाद के लिए चुनौती के रूप में हुआ कार्ल मार्क्स प्रथम अर्थशास्त्री थे जिन्होंने क्रमबद्ध रूप से केंद्रीकृत अर्थव्यवस्था को प्रस्तुत किया समाज के समांतर न्याय की स्थापना की दृष्टि से सरकार इस प्रणाली को नियंत्रित करती है इसे सामाजवाद अर्थव्यवस्था भी कहते हैं। केन्द्रीयकृत अर्थव्यवस्था एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है जिसमें उत्पादन के साधनों पर व्यक्तिगत स्वामित्व के स्थान पर समाज का स्वामित्व एवं नियंत्रण होता है। उभोग, उत्पादन ,मूल्य तथा साधनों से संबंधित सभी प्रकार के निर्णय सरकार द्वारा लिए जाते हैं ।सरकार का उद्देश्य समाज के लाभ को अधिकतम करना है ।वस्तुओं का उत्पादन समाज के हितों को ध्यान में रखकर या जाता है ।इस अर्थव्यवस्था में आर्थिक नियोजन को अपनाया जाता है।

Q.12 व्यष्टि अर्थशास्त्र का महत्व लिखिये ।

उत्तर- व्यष्टि अर्थशास्त्र के महत्व को निम्न बिंदुओं के

आधार पर समझा जा सकता है-

1.अर्थव्यवस्था को समझने में सहायक-  व्यष्टि अर्थशास्त्र में व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन किया जाता है ।संपूर्ण अर्थव्यवस्था को समझने के लिए आवश्यक है।

2. व्यक्तिगत निर्णय लेने में सहायक -  व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत उपभोक्ताओं तथा उत्पादकों को अपने-अपने क्षेत्र में निर्णय लेने में सहायक होता है।

3. कीमत सिद्धांत के विश्लेषण में सहायक - व्यष्टि विश्लेषण

 वस्तु विशेष की कीमत या साधन विशेष के पुरस्कार

निर्धारण में सर्वाधिक सहायक होता है।

4. आर्थिक नियमों के निर्माण में सहायक -  व्यष्टि अर्थशास्त्र की सहायता से उपभोक्ता ह्रास नियम , सम सीमांत उपयोगिता नियम तथा उपभोक्ता की बचत जैसे नियमों का निर्माण किया जा सकता है।

Q.13 व्यष्टि अर्थशास्त्र की सीमाएं / दोष / परिसीमाएं लिखिए

Ans. व्यष्टि अर्थशास्त्र की प्रमुख सीमाएं या दोष निम्नलिखित हैं-

1. संपूर्ण अर्थव्यवस्था का ज्ञान नहीं

व्यष्टि अर्थशास्त्र के अध्ययन से संपूर्ण अर्थव्यवस्था का

 ज्ञान नहीं हो पाता।

2. समग्र पर लागू नहीं

व्यष्टि अर्थशास्त्र में व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन किया जाता है जो समग्र पर लागू नहीं होता।

3. अपर्याप्त विश्लेषण 

व्यष्टि अर्थशास्त्र आर्थिक विश्लेषण का अपर्याप्त विश्लेषण ही कर पाता है।

4. अवास्तविक मान्यताएं

व्यष्टि अर्थशास्त्र आर्थिक विश्लेषण पूर्ण रोजगार जैसी काल्पनिक मान्यताओं पर आधारित है पूर्ण रोजगार का विचार वास्तविक जगत में नहीं दिखाई देता।

Q.14 क्या अर्थशास्त्र विज्ञान है ? OR

 यदि अर्थशास्त्र विज्ञान है तो 
 
वास्तविक विज्ञान है अथवा आदर्श विज्ञान

 क्या अर्थशास्त्र कला है ?  OR

 क्या अर्थशास्त्र विज्ञान एवं कला दोनों है OR

 अर्थशास्त्र विज्ञान है या कला ? समझाइए !

Ans. ( A ) अर्थशास्त्र विज्ञान के रूप में ( Economics is an Science ) 

विज्ञान का अर्थ (meaning of science) - विज्ञान ज्ञान का वह क्रमबद्ध और सम्पूर्ण अध्ययन है जो कारण और प्रभाव के सम्बन्ध की व्याख्या करता है । विज्ञान किसी भी घटना का वस्तुगत विश्लेषण करता है , उसका क्रमबद्ध अध्ययन करता है और इस विश्लेषण तथा अध्ययन के आधार पर किसी भी तथ्य का पूर्वानुमान कर भविष्यवाणी करता है । 

( B ) अर्थशास्त्र कला के रूप में ( Economics is an Art ) 

कला का अर्थ ( Meaning of Art ) - सामान्य अर्थ में किसी लक्ष्य की पूर्ति को कार्य कुशलता के साथ करना ही कला है । कला हमें व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करती है । यह समस्या का केवल विश्लेषण ही नहीं करती अपितु समाधान भी करती है । प्रो . कीन्स के अनुसार कला ज्ञान की वह शाखा है जो निश्चित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए एक सर्व श्रेष्ठ तरीका बताती है ।

अर्थशास्त्रियों का एक वर्ग जिसमें एडम स्मिथ , रिकार्डो , मिल , मार्शल , पीगू आदि आते हैं अर्थशास्त्र को कला मानते हैं । 

अर्थशास्त्र की वास्तविक प्रकृति : अर्थशास्त्र विज्ञान एवं कला दोनों ( Real nature of economics : economics is science as well as Art ) 

उपर्युक्त विवेचन से यह स्पष्ट है कि अर्थशास्त्र विज्ञान के साथ - साथ कला भी है । विज्ञान के रूप में अर्थशास्त्र वास्तविक विज्ञान ही नहीं अपितु आदर्श विज्ञान भी है । अर्थशास्त्र विषय के सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक दोनों पक्षों का अध्ययन करता है । सैद्धान्तिक पक्ष इसके वैज्ञानिक स्वरूप से सम्बन्धित है जबकि व्यावहारिक पक्ष कला से सम्बन्धित है । सैद्धान्तिक अर्थशास्त्र विज्ञान है

तथा व्यावहारिक अर्थशास्त्र कला । एक अर्थशास्त्री के भी वैज्ञानिक की भांति दो रूप हो सकते है । एक वैज्ञानिक के रूप में तथा एक अच्छे नागरिक के रूप में सभी । नागरिकों की भांति अर्थशास्त्री को भी यह अधिकार प्राप्त है कि वह राष्ट्र के महत्त्व के विषयों में भाग ले , बहस करें , तथा राष्ट्र के लिए तकनीकी सलाहकार के रूप में कार्य करें । सारांश में प्रो . कौसा ने ठीक ही लिखा है " विज्ञान को कला की आवश्यकता है तथा कला को विज्ञान की आवश्यकता है दोनों एक दूसरे के पूरक हैं । "

 महत्त्वपूर्ण बिन्दु 

अर्थशास्त्र की प्रकृति के सम्बन्ध में अर्थशास्त्रियों में मतभेद हैं

 कि यह विज्ञान है या कला अथवा विज्ञान एवं कलादोनों । 

  अर्थशास्त्र की विषय सामग्री को पांच भागों में

विभाजित उपभोग , विनिमय , वितरण , किया जा

सकता है - उत्पादन , राजस्व

 • अर्थशास्त्र वास्तविक विज्ञान होने के साथ - साथ आदर्शात्मक विज्ञान भी है । 

 • अर्थशास्त्र एक मानवीय विज्ञान भी है अतएव विभिन्न आर्थिक घटनाओं के सम्बन्ध में नैतिक निर्णय लेते हुए इनकी अच्छाई का अध्ययन करना भी आवश्यक है । 

 • जो शास्त्र कारण एवं परिणाम के सम्बन्ध की व्याख्या करता है विज्ञान कहलाता है । 

 • ज्ञान की वह शाखा जो निश्चित उद्देश्यों की पूर्ति

के लिए एक सर्वश्रेष्ठ तरीका बताती है उसे कला कहा

जाता है ।

Q.15 मिश्रित अर्थव्यवस्था किसे कहते हैं।

मिश्रित अर्थव्यवस्था की विशेषताएं / गुण / लक्षण लिखिए।

ANS. मिश्रित अर्थव्यवस्था व आर्थिक प्रणाली है जिसमें पूंजीवाद एवं समाजवाद का सम्मिश्रण संयोजन पाया जाता है अर्थात जिसमें पूंजीवादी अर्थव्यवस्था एवं समाजवादी अर्थव्यवस्था के गुणों का सम्मिश्रण हो अर्थात दोनों की विशेषताएं इस अर्थव्यवस्था में पाई जाती है।

मिश्रित अर्थव्यवस्था में पूंजीवादी क्षेत्र अर्थात निजी क्षेत्र

 एवं समाजवादी क्षेत्र अर्थात सरकारी क्षेत्र उपस्थित होता है।

भारत-पाकिस्तान श्रीलंका आदि देशों में यह आर्थिक प्रणाली को अपनाया गया।

1. निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र का अस्तित्व :मिश्रित अर्थव्यवस्था में निजी एवं सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों का अस्तित्व पाया जाता है अर्थात निजी तंत्रम सार्वजनिक तंत्र दोनों काम करते हैं।

2. आर्थिक स्वतंत्रता;- मिश्रित अर्थव्यवस्था में पर्याप्त सरकारी हस्तक्षेप पाया जाता है फिर भी व्यक्तिगत आर्थिक संस्थानों की उपस्थिति इस अर्थव्यवस्था में पाई जाती है अर्थात इस अर्थव्यवस्था में दोनों क्षेत्रों का संतुलन देखने को मिलता है।

3. कीमत प्रणाली :- मिश्रित अर्थव्यवस्था में कीमत प्रणाली समाजवाद से बेहतर एवं पूंजीवाद से निम्नतम होती है अर्थात कुछ निमंत्रणों के साथ एवं स्वतंत्रताओं के साथ मांग एवं पूर्ति का संतुलन रहता है।

4. सीमित प्रतियोगिता :- मिश्रित अर्थव्यवस्था में निजी एवं सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों का अस्तित्व होता है प्रतियोगिता पाई जाती है समाजवाद से अधिक एवं पूंजीवाद से कम।

Q.16 समाजवादी अर्थव्यवस्था (केंद्रीयकृत नियंत्रित

अर्थव्यवस्था) का अर्थ एवं विशेषताएं / लक्षण / गुण लिखिए। 

ANS. समाजवादी अर्थव्यवस्था आर्थिक प्रणाली है जिसमें उत्पत्ति के साधनों पर सरकार या समाज का अधिपत्य होता है और इस अर्थव्यवस्था में जनकल्याण की भावना से कार्य किया जाता है।

समाजवादी अर्थव्यवस्था या केंद्रीयकृत अर्थव्यवस्था रूस, चीन जैसे देशों इस प्रणाली को अपनाया है।

समाजवादी अर्थव्यवस्था की विशेषताएं लिखिए ।

1. सामाजिक स्वामित्व :- समाजवादी अर्थव्यवस्था में उत्पत्ति के साधनों पर समाज या सरकार का अधिपत्य होता है इन साधनों का प्रयोग सामाजिक हितों को ध्यान में रखकर किया जाता है।

2. आर्थिक स्वतंत्रता का अभाव :- समाजवादी अर्थव्यवस्था में

आर्थिक स्वतंत्रता का अभाव पाया जाता है । क्योंकि उत्पत्ति

संबंधी निर्णय सरकार या समाज द्वारा लिया जाता है।

3. कीमत तंत्र का नग्णय प्रभाव :- समाजवादी अर्थव्यवस्था में मांग एवं पूर्ति की शक्तियां स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करती, क्योंकि सरकार द्वारा निर्णयों से आर्थिक क्रियाएं प्रभावित होती है।

4. पूर्ण प्रतियोगिता की अनुपस्थिति :समाजवादी अर्थव्यवस्था में पूर्ण प्रतियोगिता का अभाव पाया जाता है।

Q.17 अर्थशास्त्र की विषय वस्तु की विवेचना कीजिए ।

उत्तर-अर्थशास्त्र की विषय वस्तु को दो भागों में बांटा जा सकता है व्यष्टि अर्थशास्त्र एवं समष्टि अर्थशास्त्र ।

व्यष्टि अर्थशास्त्र :-व्यष्टि अर्थशास्त्र में अर्थव्यवस्था के छोटे भागों का अध्ययन किया जाता है जैसे:- विशिष्ट फर्मों, विशिष्ट परिवारों ,व्यक्तिगत कीमत, व्यक्तिगत मजदुरी, व्यक्तिगत आय,

 व्यक्तिगत उद्योगों एवं विशिष्ट वस्तुओं का ।

समष्टि अर्थशास्त्र:- समष्टि अर्थशास्त्र में अर्थव्यवस्था के बड़े भागो अर्थात कुल राष्ट्रीय उत्पादन, कुल विनियोग, कुल रोजगार, कुल उपभोग आदि का अध्ययन किया जाता है।

Q.18 व्यष्टि अर्थशास्त्र की विशेषताएं लिखिए।

उत्तर - व्यष्टि अर्थशास्त्र की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं

1. व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन - व्यष्टि अर्थशास्त्र की सहायता से व्यक्तिगत आय व्यक्तिगत उत्पादन और उपभोग व्यक्तिगत लागत आदि घटकों की व्याख्या की जाती है।

2. अति सूक्ष्म चरों का अध्ययन - व्यष्टि आर्थिक विश्लेषण में अर्थव्यवस्था के छोटे-छोटे चोरों का अध्ययन किया जाता है जैसे कि एक फार्म एक उद्योग एक उपभोक्ता एक उत्पादन आदि । संपूर्ण अर्थव्यवस्था पर इन सूक्ष्म चारों का बहुत कम प्रभाव

पड़ता है।

3. कीमत सिद्धांत - व्यष्टि अर्थशास्त्र का मुख्य सिद्धांत कीमत सिद्धांत है मुख्य रूप से कीमत निर्धारण में व्यष्टि अर्थशास्त्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

4. व्यक्तिगत कीमत निर्धारण का अध्ययन - व्यष्टि

अर्थशास्त्र में बाजार की शक्तियों मांग एवं पूर्ति के संतुलन के आधार पर व्यक्तिगत इकाइयों की कीमतों का निर्धारण किया जाता है।

5. पूर्ण रोजगार की स्थिति को मान्यता - व्यष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत आर्थिक विश्लेषण करते समय पूर्ण रोजगार की मान्यता को लेकर चला जाता है।

Q.19 केंद्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था तथा बाजार अर्थव्यवस्था के भेद को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-

 

बाजार (पूंजीवाद) अर्थव्यवस्था

केंद्रीकृत योजनाबद्ध (समाजवाद) अर्थव्यवस्था

1.

उत्पत्ति के साधनों पर निजी स्वामित्व होता है।

उत्पत्ति के साधनों पर समाज का अधिकार होता है ।

2.

आर्थिक क्रियाओं का उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ कमाना होता है ।

आर्थिक क्रियाओं का उद्देश्य सामाजिक कल्याण एवं समाज की आवश्यकताओं को पूरा करना होता है।

3.

वस्तु का मूल्य मांग एवं पूर्ति की शक्तियों द्वारा निर्धारित होता है।

वस्तु का मूल्य सामाजिक कल्याण को ध्यान में रखकर किया जाता है ।

4.

केंद्रीय नियोजन का अभाव पाया जाता है ।

केंद्रीय नियोजन पर बल दिया जाता है ।

5.

वर्ग संघर्ष का अभाव ।

संघर्ष की स्तिथि।

Q.20 अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याओं की विवेचना कीजिए। 

उत्तर- एक व्यक्ति की भांति एक राष्ट्र के पास भी उत्पादन के सीमित साधन होते हैं ,इन सीमित साधनों से आय, रोजगार ,उत्पादन की संभावनाओं को हल करना होता है ।

अर्थव्यवस्था की केंद्रीय समस्याएं निम्नलिखित है :-

(1)किन वस्तुओंका उत्पादन किया जाए - केंद्रीयकृत (समाजवादी) या बाजार अर्थव्यवस्था (पूंजीवादी) को यह निश्चित करना होता है कि किन वस्तुओं का उत्पादन किया जाए ।पूंजीवाद में कीमत प्रणाली और समाजवाद में समाज या सरकार के आदेश अनुसार वस्तुओं का उत्पादन होता है ।

(2)उत्पादन का ढंग (तरीका) क्या हो? वस्तुओं का उत्पादन किस ढंग (तरीके) या तकनीक के आधार पर हो पूंजीगहन तकनीक या श्रम गहन तकनीक का प्रयोग किया जाए ।

(3)उत्पादन किनके(लोगो) लिए किया जाए? वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन किन लोगों या वर्ग के लिए किया जाए पूंजीवाद में कीमत अदा करने वाले के एवं समाजवाद में कमजोर वर्ग एवं आवश्यकता वाले वर्ग के लिए उत्पादन किया जाता है ।

(4)साधनों का प्रयोग और उत्पादन कुशलता कैसे प्राप्त की जाए ? अर्थव्यवस्था की एक समस्या यह भी है कि साधनों का संपूर्ण प्रयोग कुशलता पूर्वक कैसे किया जाय ?

(5)पूर्ण रोजगार एवं आर्थिक विकास कैसे किया जाए ? अर्थव्यवस्था में एक समस्या यह भी रहती है कि पूर्ण रोजगार की समस्या कैसे दूर की जाए और आर्थिक विकास कैसे किया जाए।

 

 

 

Text Box: इकाई -2 उपभोक्ता व्यवहार का सिद्धांत
1. उपभोक्ता का अर्थ बताइये । 

Ans. उपभोक्ता उस व्यक्ति को कहते हैं जो विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं का उपभोग करता है एवं उनसे संतुष्टि प्राप्त करता है जैसे :- गेहूं ,पंखा, टीवी ,फ्रिज आदि।

2. कुल उपयोगिता अधिकतम कब होती है

Ans. उपयोगिता के सिद्धांत अनुसार जब कुल उपयोगिता अधिकतम होती है तब सीमांत उपयोगिता शुन्य हो जाती है सीमांत उपयोगिता का शून्य होना उपभोक्ता की पूर्ण संतुष्टि को बताता है।

3. उदासीनता वक्र नकारात्मक ढाल क्यों बनाते हैं

Ans. उदासीनता वक्र दो वस्तुओं के उन संयोगो को बताता है जिनके बीच उपभोक्ता उदासीन होता है। उपभोक्ता जब एक वस्तु का उपभोग बढ़ाता है तब उसे दूसरी वस्तु के उपभोग को त्यागना पड़ता है। प्रतिस्थापन कि दर में परिवर्तन के कारण उदासीनता वक्र का ढाल ऋणात्मक होता है।

4. सीमान्त उपयोगिता ह्रास नियम के दो व्यावहारिक महत्व बताइए ।

Ans. 1. उपभोक्ता बचत का आधार-अनुमानित व्यय एवं वास्तविक व का अंतर उपभोक्ता की बचत होता है उपभोग बढ़ने पर बचत कम होती जाती है जो सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम को फॉलो करता है।

2. कर प्रणाली में उपयोगी - प्रगतिशील कर प्रणाली सीमांत

उपयोगिता ह्रास नियम पर आधारित है अमीरों की बढ़ती आय पर सरकार अधिक कर प्राप्त करती है तथा आय के वितरण में समानता लाने का प्रयास करती

5. उपभोक्ता संतुलन का अर्थ बताइये । 

 Ans. एक उपभोक्ता संतुलन की अवस्था में तब होता

 है जब अपनी सीमित आय  की सहायता से वस्तुओं को उनके दी गई किमतों पर खरीद कर अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करता है।

6. धनात्मक और ऋणात्मक उपयोगिता से क्या तात्पर्य है

Ans. उपभोक्ता की पूर्ण संतुष्टि पर सीमांत उपयोगिता शुन्य हो जाती है। सीमांत उपयोगिता वहां तक धनात्मक रहती है इसके बाद भी उपभोक्ता उपभोग जारी रखता है तो सीमांत उपयोगिता ऋणात्मक हो जाती है।

Q.7 श्रेष्ठ वस्तु क्या है ?

सामान्य वस्तु क्या है?

उत्तर - श्रेष्ठ या सामान्य वस्तु

 सामान्य वस्तुएं अथवा श्रेष्ठ वस्तु वे वस्तुएं हैं जिनमें कीमत एवं मांगी गई मात्रा में धनात्मक संबंध होता है। श्रेष्ठ वस्तुओं के संबंध में आय मांग वक्र धनात्मक ढाल वाला होता है । अर्थात बाएं से दाएं ऊपर चढ़ता हुआ , श्रेष्ठ वस्तुओं का मांग वक्र धनात्मक ढाल वाला होता है। आय मांग वक्र यह बताता है कि उपभोक्ता की आय में वृद्धि उसकी मांग में भी वृद्धि करती है तथा इसके विपरीत आय की प्रत्येक कमी सामान्य दशा में मांग में भी कमी करती है।

Q.8 घटिया वस्तु क्या है?

निम्न वस्तु क्या है?

उत्तर - घटिया या निम्न वस्तु

 घटिया वस्तुएं वह वस्तुएं होती है जिन्हें उपभोक्ता हीन दृष्टि से देखता है और आय स्तर के पर्याप्त न होने पर उपभोग करता है जैसे मोटा अनाज, वनस्पति घी, मोटा कपड़ा आदि। ऐसी दशा में जैसे-जैसे उपभोक्ता की आय में वृद्धि होती है वैसे वैसे उपभोक्ता इन घटिया वस्तुओं का उपभोग घटाकर श्रेष्ठ वस्तुओं के उपभोग में वृद्धि करने लगता है

अर्थात घटिया वस्तुओं के लिए आय मांग वक्र

ऋणात्मक ढाल वाला, बाएं से दाएं नीचे गिरता हुआ होता है।

Q.9 उपयोगिता का अर्थ बताइए ।

उपयोगिता क्या है?

ANS. उत्तर उपयोगिता का तात्पर्य है कि किसी वस्तु या सेवा के उपभोग से प्राप्त होने वाली संतुष्टि से है। दूसरे शब्दों में कहें तो वस्तु विशेष मैं किसी उपभोक्ता की आवश्यकता विशेष की

संतुष्टि की क्षमता असत्य की उपयोगिता कहलाती है।

Q.10 सीमांत उपयोगिता क्या है ?

उत्तर सीमांत उपयोगिता का अर्थ

  "एक अतिरिक्त इकाई से कुल उपयोगिता में होने वाली वृद्धि सीमांत उपयोगिता कहलाती है।"

परिभाषा प्रोफेसर मोल्डिंग के अनुसार -" किसी वस्तु की दी हुई मात्रा की सीमांत उपयोगिता कुल उपयोगिता में होने वाली वृद्धि है जो उसके उपभोग में एक अतिरिक्त इकाई के बढ़ने के परिणाम स्वरूप होती है।"

MUn = TUn - TUn-1

Q.11  पूरकों (पूरक वस्तुओं) को परिभाषित कीजिए ।ऐसी दो वस्तुओं के उदाहरण दीजिए, जो एक दूसरे के पूरक हैं । पूरक वस्तु की परिभाषा दीजिए।

उत्तर- पूरक वस्तुएं वे वस्तुएं हैं जो एक साथ प्रयोग में लाई जा सकती है। जैसे- कार- पैट्रोल ,पेन- स्याही आदि।

"अन्य बातें समान रहने पर एक वस्तु के मूल्य में परिवर्तन होने पर दूसरी वस्तु की मांग में विपरीत परिवर्तन होगा।" अर्थात पेट्रोल के मूल्य में वृद्धि पर कार की मांग कम हो होगी।

इसे एक उदाहरण से समझे - पेट्रोल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होने पर कार की मांग कम हो जाएगी, क्योंकि कार एवं पेट्रोल एक दूसरे के पूरक हैं। एक वस्तु की कीमत यहां दूसरी वस्तु की मांग को प्रभावित कर रही है।

प्रश्न -12 स्थानापन्न को परिभाषित कीजिए । ऐसी दो वस्तुओं के उदाहरण दीजिए । जो एक-दुसरे के स्थानापन्न हैं ।

उत्तर - स्थानापन्न वस्तुएं वे वस्तुएं हैं जो एक दूसरे के स्थान पर एक ही उद्देश्य के लिए प्रयोग की जा सकती है।

उदाहरण के लिए चाय- कॉफी, गुड़ -शक्कर, मैंगो जूस- ऑरेंज जूस आदि।

"अन्य बातें समान रहने पर एक वस्तु के मूल्य में परिवर्तन होने के परिणाम स्वरूप दूसरी वस्तु की मांग में सीधा परिवर्तन होगा जबकि दूसरी वस्तु की कीमत स्थिर रहती है।"

अर्थात एक वस्तु की कीमत और दूसरी वस्तु की मांग में सीधा संबंध होता है।

Q.13 एकदिष्ट अधिमान'से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर - एक उपभोक्ता दो वस्तुओं के विभिन्न बण्डलों में से उस बण्डल या संयोग को अधिमान देता है जिसमें इन वस्तुओं में से कम से कम एक वस्तु की अधिक मात्रा हो दुसरे बण्डल (संयोग) की तुलना में

दुसरी वस्तु की मात्रा भी कम न हो।

 एकदिष्ट अधिमान किन्हीं दो संयोगों में से उस संयोजन को

चुनना है जिसमें दुसरे संयोग से कम मात्रा नहीं हो।

Q.14 उपभोक्ता की बजट सेट से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- उपभोक्ता के बजट सेट सभी बंडलों (संयोगों) का संग्रह है जिसे उपभोक्ता विद्यमान बाजार कीमतों पर अपनी आय से खरीद सकता है।

Q.15 बजट रेखा क्या है?

उत्तर-  बजट  रेखा -" बजट  रेखा  उपभोक्ता  की 

इच्छा  एवं  क्षमता (आय)  के  आधार  पर  वस्तुओं  के विभिन्न  संयोगों  को  प्राप्त  करने की रेखा है। "

16. मांग की लोच के प्रकारों का वर्णन कीजिए । 

मांग की लोच के तीन प्रकार हैं जो निम्नलिखित हैं।

1.मांग की कीमत लोच- मांग की कीमत लोच वस्तु की कीमत में

 प्रतिशत परिवर्तन के अनुपात में मांगी गई मात्रा में कितना

परिवर्तन होता है की माप है।

 सूत्र 

मांग की कीमत लोच= मांग में अनुपातिक परिवर्तन/ कीमत में अनुपातिक परिवर्तन 

वस्तु की कीमत और मांगी गई मात्रा में विपरीत संबंध होता है।

2. मांग की आय लोच- उपभोक्ता की आय के अनुपात की तुलना में मांगी गई मात्रा में कितना परिवर्तन होता है यह मांग की आय लोच से ज्ञात किया जा सकता है उपभोक्ता की आय और मांगी गई मात्रा में सीधा संबंध पाया जाता है।

3. मांग की आय लोच- एक वस्तु की कीमत में परिवर्तन का दूसरी वस्तु की मांग पर क्या प्रभाव पड़ता है यह मांग की आर्यन दोस्त से याद किया जाता है प्रतिस्थापन वस्तुएं इन वस्तुओं की मांग एक दूसरे के बदले की जाती है चाय कॉफी पूरक वस्तुएं इन वस्तुओं की मांग एक साथ की जाती है जैसे कार पेट्रोल।

Q.17 उपयोगिता ह्रास नियम के अपवाद लिखिये । अथवा

उपयोगिता ह्रास नियम की ( सीमाएं या आलोचनाएं ) कब / कहां लागू नहीं होता है।

उत्तर- उपयोगिता हास नियम की कुछ आलोचना एवं अपवाद कहे जाते हैं जो कि निम्नलिखित हैं।

1. वस्तु के उपभोग इकाइयां बहुत छोटी होने पर यह

 नियम लागू नहीं होता जैसे प्यासे व्यक्ति को बूंद बूंद करके पानी पिलाने पर उसकी सीमांत उपयोगिता बढ़ती जाती है परंतु संतुष्टि प्राप्त नहीं होती इसीलिए उपभोग इकाइयों का आकार उपयुक्त होना चाहिए।

2. दुर्लभ तथा शान शौकत की वस्तुओं पर यह नियम लागू नहीं होता। परंतु यह बात सही नहीं है एक ही वस्तु के लिए अधिक

इकाइयों के प्रयोग से उपयोगिता अवश्य घटेगी।

3. शराब के उपभोग के संबंध में यह नियम लागू नहीं होता यह अपवाद भी ठीक नहीं है शराब पीने पर मानसिक दशा सामान्य ना होने के कारण ऐसा हो सकता है, फिर भी एक सीमा के बाद तो शराब के सीमांत उपयोगिता घटेगी और अंत में ऋणआत्मक हो जाएगी।

4. मुद्रा के संचय के संबंध में यह नियम लागू नहीं होता जैसे जैसे व्यक्ति के पास धन आता है वह उसे और अधिक प्राप्त करना चाहता है परंतु ध्यान रहे मुद्रा से विभिन्न वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं एक सीमा के पश्चात मुद्रा की सीमांत उपयोगिता भी घटती है।

5. मधुर कविता अथवा गीत को बार-बार सुनने पर उसकी उपयोगिता बढ़ती जाती है सुंदर कविता को बार बार सुनने पर उपयोगिता घटने की बजाय बढ़ती जाती है एक सीमा के पश्चात उसकी उपयोगिता भी घटने लगती है।

Q.18 मांग की लोच को प्रभावित करने वाले प्रमुख तत्वों/ घटकों / कारकों को समझाइये

ANS. मांग की लोच को प्रभावित करने वाले प्रमुख तत्व / घटक / कारक

उत्तर- मांग की लोच को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित है।

1. वस्तु की प्रकृति

2. स्थानापन्न वस्तुओं की उपलब्धता

3. वस्तु का प्रयोग

4. उपभोक्ता की आदत

5. क्रेताओं का आय का स्तर

6. समय अवधि

1. वस्तु की प्रकृति साधारणतया अनिवार्य वस्तुओं जैसे - नमक, मिट्टी का तेल, माचिस, पुस्तकें आदि की मांग बेलोचदार होती है | विलासिता की वस्तुओं जैसे TV, सोना की मांग लोचदार होती है।

2. स्थानापन्न वस्तुओं की उपलब्धता ऐसी वस्तुओं की मांग जिनके निकट स्थानापन्न जैसे चाय तथा कॉफी होते हैं उनकी मांग अधिक लोचदार होती है। जिन वस्तुओं के निकट स्थानापन्न जैसे- सिगरेट उपलब्ध

नहीं होते उनके मांग अपेक्षाकृत कम लोचदार होती है।

3. वस्तु का प्रयोग जिन वस्तुओं का प्रयोग अनेक कार्यों में किया जा सकता है उनकी मांग की लोच अधिक लोचदार होती है। जैसे बिजली

4. उपभोक्ताओं की आदत उपभोक्ताओं को जिन वस्तुओं की आदत पड़ जाती है उनकी मांग भी लोचदार होती है। जैसे सिगरेट तथा तंबाकू कर का भार अधिक होने पर भी सिगरेट तथा तंबाकू की मांग कम नहीं होती है।

5. केताओं का आय स्तर एक वस्तु की मांग की लोच इसके केताओं के आय स्तर पर भी निर्भर करती है। यदि किसी वस्तु के उपभोक्ता अधिक आय वाले होते हैं तो वे कीमत बढ़ने पर भी मांगी गई मात्रा में कमी नहीं करते। अरबपतियों द्वारा विलासिता पूर्ण कारों की मांग

6. समय अवधि अल्पकाल में किसी वस्तु की मांग बेलोचदार होती है, तथा दीर्घकाल में लोचदार होती है। इसका कारण यह है कि दीर्घकाल एक पर्याप्त अवधि होती है जिसमें एक उपभोक्ता अपनी उपभोग आदतों में सहज रूप से परिवर्तन कर सकता है।

Q.19 उपयोगिता की विशेषताएं बताइए।

उत्तर- उपयोगिता की विशेषताएं

✍️1. उपयोगिता एक मनोवैज्ञानिक धारणा है :- उपयोगिता का कम या अधिक होना उपभोक्ता के मानसिक दशा पर निर्भर करता है।

✍️2. उपयोगिता व्यक्तिनिष्ठ होती है :- एक ही वस्तु या सेवा से अलग-अलग व्यक्तियों को अलग-अलग उपयोगिता प्राप्त हो सकती हैं अर्थात उपयोगिता व्यक्ति निष्ठ होती है।

✍️3. उपयोगिता सापेक्षिक होती है :-समय और स्थान के अनुसार उपयोगिता में परिवर्तन आ जाता है।

✍️4. उपयोगिता का लाभदायक का से कोई संबंध नहीं :- उपयोगिता का लाभ दाता से कोई संबंध नहीं होता है उपयोगिता वस्तु के उपभोग से मिलने वाली संतुष्टि से संबंध रखती है।

✍️5. उपयोगिता की माप कठिन :- वस्तु के उपभोग के बाद मिलने वाली संतुष्टि का अनुमान लगाना है उसे मापना कठिन होता है। अर्थात उपयोगिता की माप अनुमानित की होती है।

Q.20 मांग का नियम लिखिए ।

मांग के नियम की सचित्र व्याख्या कीजिए।

मांग का नियम क्या है?

मांग के नियम की परिभाषा दीजिए।

उत्तर - प्रोफेसर मार्शल के अनुसार  - "यदि अन्य बातें समान रहे तो किसी वस्तु के मूल्य कम होने पर उसकी मांग बढ़ जाती है और मूल्य अधिक होने पर उसकी मांग कम हो जाती है।"

मांग का नियम वस्तु की कीमत और वस्तु की मांगी जाने वाली मात्रा में विपरीत संबंध को बताता है।

मांग का नियम वस्तु की कीमत और उस वस्तु की मांगी जाने वाली मात्रा के गुणात्मक संबंध को बताता है। अर्थात वस्तु की कीमत में परिवर्तन के फल स्वरुप उसकी मांगी जाने वाली मात्रा की दिशा में परिवर्तन को बताता है।

मांग के नियम की सचित्र व्याख्या

Q.21 मांग की कीमत लोच का अर्थ लिखिए। मांग की कीमत लोच की श्रेणीयां या प्रकार लिखिए।

मांग की कीमत लोच को परिभाषित कीजिए ।

उत्तर - मांग की लोच या मांग की कीमत लोच का अर्थ -

मांग की कीमत लोच किसी वस्तु की कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के परिणाम स्वरुप उस वस्तु की मांग में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन का अनुपात बताती हैं।

मांग की कीमत लोच की श्रेणियां या प्रकार

कीमत लोच की चित्र द्वारा व्याख्या

1. सापेक्षत: लोचदार मांग ( e > 1 ) इकाई से अधिक लोचदार

सापेक्षत: लोचदार मांग में कीमत में परिवर्तन के अनुपात में मांगी गई मात्रा में अधिक परिवर्तन होता है।

2. सापेक्षत: बेलोचदार मांग ( e < 1 ) इकाई से कम लोचदार

सापेक्षत: बेलोचदार मांग में कीमत में परिवर्तन के अनुपात में मांगी गई मात्रा में कम परिवर्तन होता है।

3. इकाई लोचदार मांग ( e = 1 ) इकाई के बराबर लोचदार

इकाई लोचदार मांग में कीमत में परिवर्तन के अनुपात में मांगी गई मात्रा में बराबर परिवर्तन होता है।

4. पूर्ण बेलोचदार मांग ( e = 0 ) शून्य लोचदार

पूर्ण बेलोचदार मांग में कीमत में परिवर्तन के अनुपात में मांगी गई मात्रा में शून्य परिवर्तन होता है

5. पूर्ण लोचदार मांग ( e = °° ) अनंत लोचदारपूर्ण

लोचदार मांग में कीमत में परिवर्तन के अनुपात में मांगी गई मात्रा में अनंत परिवर्तन होता है।

Q.22 बजट रेखा की प्रवणता नीचे की ओर क्यों होती है? समझाइए।

उत्तर- बजट रेखा की प्रवणता-" एक वस्तु की मात्रा में

 परिवर्तन के परिणाम स्वरूप दूसरी वस्तु की मात्रा में

 परिवर्तन की दर को मापती है।

जब एक वस्तु की मात्रा में वृद्धि की जाती है तो दूसरी वस्तु की मात्रा में उतनी ही मूल्य की कमी हो जाती है।

प्रवणता मापन का सूत्र: 

p1x1+p2x2=m.       

=x2x1= -p1/p2

23. सीमांत उपयोगिता , कुल उपयोगिता तथा औसत उपयोगिता में सम्बंध बताइये । 

उत्तर कुल उत्पाद सीमांत उत्पाद और औसत उत्पाद में निम्नलिखित संबंध है।

1. उत्पादन के प्रथम अवस्था में कुल उत्पादन मोड़ के बिंदु तक बढ़ती हुई अवस्था में तथा मोड़ के बिंदु के बाद भी बढ़ती हुई दर से बढ़ता है सीमांत उत्पादन भी मोड के बिंदु तक तेजी से बढ़ता है तथा औसत उत्पादन धनात्मक रूप से बढ़ता है।

2. उत्पादन की दूसरी अवस्था में कुल उत्पादन इधर से बढ़ता है और अंतिम रूप से अधिकतम हो जाता है सीमांत उत्पादन घटने लगता है तथा औसत उत्पादन भी घटता है पर दोनों धनात्मक रहते हैं।

3. उत्पादन के तृतीय अवस्था में कुल उत्पादन गिरने लगता है जबकि सीमांत उत्पादन ऋणात्मक हो जाता है एवं औसत उत्पादन भी गिरता है किंतु धनात्मक रहता है।

24. उदासीनता वक्र क्षैतिज या लम्बवत् अक्ष को स्पर्श क्यों नहीं करते हैं ? स्पष्ट कीजिए । 

Ans. उदासीनता वक्र के सिद्धांत अनुसार उसकी एक विशेषता है कि वह किसी भी अक्ष X या Y को छू नहीं सकता। क्योंकि उदासीनता वक्र दो वस्तुओं के ऐसे संयोग को बताता है जिन पर उपभोक्ता व्यय करता है अगर उपभोक्ता वक्र किसी एक अक्ष को स्पर्श करता है तो उस अक्ष की 0 शून्य मात्रा ही प्राप्त करता है और दूसरी वस्तु पर उसका संपूर्ण व्यय होगा जो कि नियम

 अनुरूप नहीं है ।

25. सम - सीमांत उपयोगिता हास नियम को एक उदाहरण द्वारा समझाइए 

Ans. सम-सीमांत उपयोगिता नियम बताता है कि एक उभोक्ता अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करने के लिए अपनी आय को विभिन्न वस्तुओं पर इस प्रकार व्यय करेगा कि प्रत्येक वस्तु पर खर्च की गई रुपए के अंतिम इकाई से प्राप्त होने वाली सीमांत उपयोगिता बराबर हो जाए।

माना के एक उपभोक्ता दो वस्तुओं अमरूद और केला पर ₹12 खर्च करता है।

इकाइयां 

अमरूद की सीमांत उप.

केला की सीमांत उप.

1

100

80

2

80

40

3

60

30

4

40

20

5

20

10

40/2=40/2=20

इस परिस्थिति में उपभोक्ता 4 इकाई अमरूद की और 2 इकाई केले की4 खरीदता है।

चूंकि कुल व्यय=कुल आय

4 इकाई अमृत की लागत =4x2=8

दो इकाई केला की लागत=2x2=4

इस प्रकार उन्हें ₹12 हुआ।

Q.26 एक उपभोक्ता दो वस्तुओं का उपभोग करने के लिए इच्छुक है। दोनों वस्तुओं की कीमत क्रमशः ₹4 ₹5 है । उपभोक्ता की आय ₹20 हैः (1)बजट रेखा के समीकरण को लिखिए । (2)उपभोक्ता यदि अपनी संपूर्ण आय वस्तु 1 पर व्यय कर दे,तो वह उसकी कितनी मात्रा का उपयोग कर सकता है ? (3)यदि वह अपनी संपूर्ण आय वस्तु 2 पर व्यय कर दे, तो वह उसकी कितनी मात्रा का उपभोग कर सकता है ? (4)बजट रेखा की प्रवणता क्या है

ANS. (1)बजट रेखा के समीकरण को लिखिए ।

उत्तर -बजट रेखा का समीकरण  

P1 X1 + p2 x2 = m

X1 और x2 दो वस्तुएं हैं 

P1 x1 वस्तु की कीमत 

p2 x2 वस्तु की कीमत 

m उपभोक्ता की आय है।

(2) उपभोक्ता यदि अपनी संपूर्ण आय वस्तु X पर व्यय कर दे,तो वह उसकी कितनी मात्रा का उपभोग कर सकता है ?  

उत्तर - बजट रेखा समीकरण Px+Py=M

                4x+5y=20

   y=0(yवस्तु पर कुछ भी खर्च नही)

4x+5*0=20

4x=20

X=20/4        X=5

संपूर्ण आय वस्तु X पर व्यय करने पर 5 मात्रा का उपभोग कर सकता है।

(3)यदि वह अपनी संपूर्ण आय वस्तु y (दूसरी वस्तु) पर व्यय कर दे, तो वह उसकी कितनी मात्रा का उपभोग कर सकता है ?

उत्तर - बजट रेखा समीकरण Px+Py=M

4x+5y=20

y=0(X वस्तु पर कुछ भी खर्च नही)

4*0+5y=20

5y=20

y=20/5

y=4

संपूर्ण आय वस्तु y पर व्यय करने पर 4 मात्रा का उपभोग कर सकता है।

 

(4)बजट रेखा की प्रवणता क्या है ?

उत्तर - बजट रेखा की प्रवणता (ढाल)=Px/Py

=4/5

=0.8

Note-( * )means multiple 

(*) का मतलब गुणा से है।

प्रश्न -27 यदि उपभोक्ता की आय बढ़कर ₹40 हो जाती है, परंतु कीमत अपरिवर्तित रहती है तो बजट रेखा में क्या परिवर्तन होता है ? (प्रश्न 4 से संबंधित हैं।) 

उत्तर - उपभोक्ता की आय बढ़ाने पर बजट रेखा

4x+5y=40 (दिया गया है)

4x+5*0=40

4x=40

X=40/4 

X=10 इकाईयां

4x+5y=40 (दिया गया है)

4*10+5y=40

5y=40

Y=40/5

Y=8 इकाईयां

 उपभोक्ता की आय में वृद्धि करने पर X वस्तु की 10 वह y वस्तु की 8 इकाइयां खरीदेगा और इसकी बजट रेखा बाएं से दाएं समानांतर खिसक जाएगी।

Q.28 यदि वस्तु y (दूसरी वस्तु) की कीमत में 1₹ की गिरावट आ जाए परन्तु वस्तु X (पहली वस्तु) की कीमत में तथा उपभोक्ता की आय में कोई परिवर्तन नहीं हो, तो बजट रेखा में क्या परिवर्तन आएगा ? (प्रश्न 4 से संबंधित) 

उत्तर - पुराना समीकरण 4x+5y=20

y वस्तु में 1₹ की गिरावट

Py=5-1=4 अर्थात

Py=4

4y=20

Y=20/4

Y=5 इकाइयां

Q.29 अगर कीमतें और उपभोक्ता की आय दोनों दुगुनी हो जाए, तो बजट सेट कैसा होगा ?(प्रश्न 4 से संबंधित)

उत्तर - पुराना समीकरण 4x+5y=20

नया समीकरण 2(4x)+2(5y)=2*20

अर्थात

8x+10y=40

8x=40

X=40/8

X=5 इकाइयां

10y=40

Y=40/10

Y=4 इकाइयां

X और y वस्तुओं की इकाइयां पूर्ववत ही है इसलिए बजट रेखा में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

Q.30 मान लीजिए कि कोई उपभोक्ता अपनी पूरी आय को व्यय करके वस्तु 1 (X) की 6 इकाइयाँ तथा वस्तु 2 (y) की 8 इकाइयाँ खरीद सकता है । दोनों वस्तुओं की कीमतें क्रमशः 6₹ तथा 8₹ हैं । उपभोक्ता की आय कितनी हैं

उत्तर - 

वस्तु 1(X)=6 इकाइयां

वस्तु 1(X) की कीमत(Px) =6

वस्तु 2(y)=8 इकाइयां

वस्तु 2(y) कीमत(Py) =8

उपभोक्ता की आय=?

बजट रेखा का समीकरण= 

M=Px+Py

M=6*6+8*8

M=36+64

M=100

अतः उपभोक्ता की आय 100₹ होगी।

Q.31 मान लीजिए, उपभोक्ता दो ऐसी वस्तुओं का उपभोग करना चाहता है जो केवल पूर्णांक इकाइयों में उपलब्ध है । दोनों वस्तुओं की कीमत ₹10 के बराबर ही है तथा उपभोक्ता की आय ₹40 है । (1)वे सभी बंडल (संयोग) लिखिए,जो उपभोक्ता के लिए उपलब्ध हैं ।(2) जो बंडल उपभोक्ता के लिए उपलब्ध हैं ,उनमें से वे बंडल कौन से हैं जिन पर उपभोक्ता के पूरे ₹40 व्यय हो जाएंगे । 

(1)वे सभी बंडल (संयोग) लिखिए,जो उपभोक्ता के लिए उपलब्ध हैं ।

उत्तर - 

Px=40

X=40/10

X=4

10y=40

Y=40/10

Y=4

उपभोक्ता के उपलब्ध बंडल निम्नलिखित है-

(0,0)(0,1)(0,2)(0,3)(0,4)

(1,0)(1,1)(1,2)(1,3)

(2,0)(2,1)(2,2)

(3,0)(3,1)

(4,0)

(2) जो बंडल उपभोक्ता के लिए उपलब्ध हैं ,उनमें से वे बंडल कौन से हैं जिन पर उपभोक्ता के पूरे ₹40 व्यय हो जाएंगे ।

उत्तर - 

बजट रेखा का समीकरण

= M=Px+Py

10+10=40

उपभोक्ता अपनी सम्पूर्ण आय, व्यय करके निम्न बंडल (संयोग) खरीद सकता है। 

(4,0)(3,1)(2,2)(1,3)(0,4)

Q.32 यदि एक उपभोक्ता के अधिमान एकदिष्ट हैं, तो क्या वह बंडल (संयोग) (10,08) और बंडल (संयोग) (8,6) के बीच तटस्थ हो सकता है

उत्तर - यदि एक उपभोक्ता के अधिमान एकदिष्ट है तो वह बंडल (10,8)और (8,6) के बीच कभी तटस्थ नहीं हो सकता , क्योंकि बंडल (10,8) अर्थात संयोग उसे ऊंचा अधिमान प्रदान करता है। 

इसे चित्र के माध्यम से समझा जा सकता है

Q.33 मान लीजिए, कि उपभोक्ता के अधिमान एकदिष्ट बंडल (10,10)(10,9) तथा (9,9) पर उसके अधिमान श्रेणीकरण के विषय में आप क्या बता सकते

 हैं ?

ANS.

दिये गये संयोगों में से प्राथमिकता क्रम क्रमश: A,B,C को चुनेगा क्योंकि A संयोग पर उपभोक्ता ऊंचे अधिमान पर है फिर B पर है। C बिन्दु पर अधिमान वक्र सबसे नीचे है।

Q.34 मान लीजिए की आपका मित्र ,बंडल (5,6) तथा (6,6)के बीच तटस्थ है । क्या आपके मित्र के अभिमान एकदिष्ट हैं

उत्तर - मित्र के दो संयोग (बंडल) (5,6) तथा (6,6) हैं। दोनों बंडलों के बीच उपभोक्ता तटस्थ नहीं रहेगा क्योंकि बंडल (6,6) से अधिक संतुष्टि प्राप्त हो रही है। अर्थात मित्र के अधिमान एकदिष्ट नहीं है।

Q.35 मान लीजिए कि बाजार में एक ही वस्तु के लिए दो उपभोक्ता हैं तथा उनके मांग फलन इस प्रकार हैंः- D1(p)=20-p किसी भी ऐसी कीमत के लिए जो 20 से कम या बराबर हो तथा D1(p)=0 किसी ऐसी कीमत के लिए जो 20 से अधिक हो। D2(p)=30-2p किसी भी ऐसी कीमत के लिए जो 15 से कम या बराबर हो और बाजार मांग फलन को ज्ञात कीजिए। 

प्रश्न 14- मान लीजिए कि बाजार में एक ही वस्तु के लिए दो उपभोक्ता हैं तथा उनके मांग फलन इस प्रकार हैंः-

D1(p)=20-p किसी भी ऐसी कीमत के लिए जो 20 से

 कम या बराबर हो तथा D1(p)=0 किसी ऐसी कीमत के लिए जो 20 से अधिक हो। 

D2(p)=30-2p किसी भी ऐसी कीमत के लिए जो 15 से कम या बराबर हो और बाजार मांग फलन को ज्ञात कीजिए।

उत्तर - 

D1(p)=20-p समीकरण 1

D2(p)=30-2p समीकरण 2

दोनों समीकरणों का योग करने पर

 D1(p)=20-p

 D2(p)=30-2p 

(D1+D2)=50-3p

एक ही वस्तु के लिए दो उपभोक्ताओं का मांग फलन दोनों समीकरणों का योग होगा अर्थात (D1+D2)=50-3p बाजार मांग होगी ।

इसी प्रकार बाजार मांग 15₹ से कम या बराबर वाली कीमत पर 50 - 3p होगी और 15 से अधिक कीमत पर शून्य (0) होगी।

Q.36 मान लीजिए, वस्तु के लिए 20 उपभोक्ता हैं तथा उनके माँग फलन एक जैसे हैं d(p)=10-3p किसी ऐसी कीमत के लिए जो 10/3 से कम हो अथवा बराबर हो तथा d1(p)=0 किसी ऐसी कीमत पर 10/3 से

अधिक है । बाजार मांग फलन क्या है ?

ANS. प्रश्न - 15

मान लीजिए, वस्तु के लिए 20 उपभोक्ता हैं तथा उनके माँग फलन एक जैसे हैं 

d(p)=10-3p किसी ऐसी कीमत के लिए जो 10/3 से कम हो अथवा बराबर हो तथा 

d1(p)=0 किसी ऐसी कीमत पर 10/3 से अधिक है । बाजार मांग फलन क्या है ?

Q.37 एक ऐसे बाजार को लीजिए, जहाँ केवल दो उपभोक्ता हैं तथा मान लीजिए वस्तु के लिए उनकी माँगें इस प्रकार हैः वस्तु के लिए बाजार माँग की

गणना कीजिए ।

ANS. प्रश्न - 16 एक ऐसे बाजार को लीजिए, जहाँ केवल दो उपभोक्ता हैं तथा मान लीजिए वस्तु के लिए उनकी माँगें इस प्रकार हैः

वस्तु के लिए बाजार माँग की गणना कीजिए ।

उत्तर - वस्तु के लिए बाजार मांग की गणना = तालिका

1₹price 9+24=33

2₹price 8+20=28

3₹price 7+18=25

4₹price 6+16=22

5₹price 5+14=19

6₹price 4+12=16

अलग-अलग कीमतों पर सभी उपभोक्ताओं की मांग का योग बाजार मांग कहलाता है।

कीमत वृद्धि के साथ-साथ बाजार मांग में कमी हो रही है जो मांग के नियम को बताती है।

Q.38 एक वस्तु की मांग पर विचार करें। 4₹ की कीमत पर उस वस्तु की 25 इकाइयां की मांग है। मान लीजिए वस्तु की कीमत बढ़कर 5₹ हो जाती है। तथा परिणाम स्वरूप वस्तु की मांग घटकर 20 इकाइयां हो जाती है। कीमत लोच की गणना कीजिए।

उत्तर - 

कीमत लोच = Q/Q * P/P

पूर्व कीमत = 4

पूर्व मात्रा। =25

नवीन कीमत P = 5

नवीन मात्रा Q = 20

=Q/Q * P/P

 = 20/25 * 4/5

= 100/125

= 4/5

= 0.8

कीमत लोच 0.8 होगी।

Q.39 मांग वक्र D(p)=10-3p को लीजिए । कीमत 5/3 पर लोच क्या है

उत्तर - 

D(p) = 10-3p

 P(कीमत) = 5/3

.'. Q = 10-3P

 Q = 10-3(5/3)

 Q = 10-15/3

 Q = 10-5

 Q = 5

 Q का P के सापेक्ष अवकलन करने पर हम प्राप्त करते हैं।

Q.40 मान लीजिए किसी वस्तु की मांग की कीमत लोच -0.2 है । यदि वस्तु की कीमत में 5% की वृद्धि होती है, तो वस्तु के लिए मांग में कितने प्रतिशत कमी आएगी ?

उत्तर - 

कीमत लोच ed = -0.2

कीमत में प्रतिशत प्रतिशत (अनुपातिक) परिवर्तन %P =5

मांगी के मात्रा में प्रतिशत(अनुपातिक) परिवर्तन% Q =? 

मांग की लोच ed =मांगी के मात्रा में प्रतिशत 

परिवर्तन% Q /कीमत में प्रतिशत प्रतिशत परिवर्तन %P =5

ed = %Q/%P

= -0.2=%Q/5

= %Q=(-0.2)*5=-1

कीमत में 5% की वृद्धि से मांग में 1% की कमी आएगी।

Q.41 मान लीजिए किसी वस्तु की मांग की कीमत लोच -0.2 है । यदि वस्तु कीमत में 10% की वृद्धि होती है, तो उस वस्तु पर होने वाला व्यय किस प्रकार प्रभावित होगा ?

उत्तर - कीमत लोच =-0.2

कीमत में प्रतिशत परिवर्तन %P =10

मांगी गई मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन %Q=?

मांग की कीमत लोच ep= मांग गई मात्रामें प्रतिशत परिवर्तन% Q /कीमत में प्रतिशत प्रतिशत परिवर्तन %P =5

ed = %Q/%P

= -0.2=%Q/10

= %Q=(0.2)*10

= %Q=-2

Q.42 मान लीजिए कि किसी वस्तु की कीमत में 4% की गिरावट होने के परिणाम स्वरूप उस पर होने वाले व्यय में 2% की वृद्धि हो गई । आप मांग की लोच के बारे में क्या कहेंगे

उत्तर - कीमत में प्रतिशत कमी %P = 4

कुल व्यय में प्रतिशत वृद्धि %E = 2

मांग की लोच ed = %Q(E)/%P

= 2/4      

=0.5

कीमत में प्रतिशत कमी वस्तु पर होने वाले व्यय में वृद्धि से अधिक है, अतः मांग की लोच इकाई से कम अर्थात ep>1 बेलोचदार हैं।

 

इकाई -3 आगम एवं लागत

Q.1 कुल लागत क्या है ?

ANS. किसी फॉर्म को उत्पादन की एक निश्चित मात्रा उत्पादित करने के लिए जो कुवे वहन करना पड़ता है उसे फर्म की कुल लागत कहते हैं।

कुल लागत = स्थिर लागत + परिवर्तनशील लागत

Q.2 औसत लागत क्या है ?

ANS. कुल लागत को वस्तु की उत्पादित मात्रा से भाग देकर औसत लागत प्राप्त की जा सकती हैं।

       

Q.3 सीमांत लागत क्या है ?

उत्तर - अन्य साधनों की मात्रा को स्थिर रखकर परिवर्तनशील साधन की एक अतिरिक्त इकाई के प्रयोग से कुल लागत की मात्रा में होने वाला परिवर्तन सीमांत लागत MC कहा जाता है ।

MCn = TCn - TCn-1

Q.4 आगम क्या है ?

ANS. उत्पादक द्वारा वस्तु की निश्चित मात्रा को बेचकर प्राप्त की जाने वाली धनराशि आगम कहलाती है।

Q.5 सीमांत आगम क्या है ?

ANS. उत्पादन की एक अतिरिक्त इकाई से कुल आगम में होने वाली वृद्धि सीमांत आगम कहलाती है।

MRn = TRn - TRn - 1

Q.6 कुल आगम क्या है ?

ANS. कुल आगम एक फर्म द्वारा उत्पादन की एक निश्चित

मात्रा को बेचकर जो धनराशि प्राप्त करती है उसे कुल आगम कहते हैं।

कुल आगम = वस्तु की बेची गई मात्रा × प्रति इकाई कीमत

Q.7 औसत आगम क्या है?

ANS. फर्म द्वारा वस्तु को बेचकर प्राप्त कुल आगम को वस्तु की बिक्री मात्रा से भाग देकर औसत आगम ज्ञात किया जाता है।

Q.8 पूर्ति का नियम लिखिए।

ANS. अन्य बातें स्थिर रहते हुए किसी वस्तु की कीमत में वृद्धि होने पर उसकी पूर्ति में भी वृद्धि होती है तथा कीमत में कमी होने पर उसकी पूर्ति में भी कमी होती है। इसे पूर्ति का नियम कहते हैं ।वस्तु की कीमत तथा वस्तु की पूर्ति मैं सीधा या

 धनात्मक संबंध होता है।

Q.9 पूर्ति की लोच से आप क्या समझते हैं?

ANS. पूर्ति की लोच से तात्पर्य किसी वस्तु की कीमत के अनुपात में उसकी मांगी गई मात्रा में हुआ परिवर्तन पूर्ति की लोच कहलाता है।

Q.10 कुल उत्पादन क्या है?

एक आगत (साधन) का कुल उत्पाद क्या होता है ?

उत्तर - अन्य सभी आगतों (साधनों) की मात्रा को स्थिर रखकर जब एक साधन आगत की मात्रा में परिवर्तन किया जाता है, तब उस उत्पादन के विभिन्न स्तरों पर प्रयोग के लिए उत्पादन फलन से विभिन्न स्तरों के उत्पादन प्राप्त होते हैं । परिवर्ती आगत (परिवर्तनशील साधन) और निर्गत के बीच के इस संबंध को कुल उत्पाद कहा जाता है।

Q.11 सीमांत उत्पादन क्या है?

एक आगत (साधन) का सीमांत उत्पाद MP क्या होता है ?

उत्तर - अन्य साधनों की मात्रा को स्थिर रखकर परिवर्तनशील साधन की एक अतिरिक्त इकाई के प्रयोग से कुल उत्पादन की मात्रा( दर) में होने वाला परिवर्तन सीमांत उत्पाद MP कहा जाता है ।

MPn = TPn - TPn-1

Q.12 स्थिर लागत क्या है।

स्थिर लागत

स्थिर साधनों को दिया जाने वाला पारितोषिक व्यय स्थिर लागत

होता है। यह व्यय अनिवार्य वह होता है जैसे :- भूमि को किराया, मशीन की लागत ,चौकीदार का वेतन आदि।

Q.13 परिवर्तनशील लागत क्या है?

परिवर्तनशील लागत

ANS. परिवर्तनशील साधनों को दिए जाने वाला

पारितोषिक व्यय परिवर्तनशील लागत कहलाता है ।

जैसे कच्चा माल , बिजली बिल , परिवहन आदि ।

Q.14 लागत फलन क्या है?

लागत फलन का अर्थ : - उत्पादन की मात्रा उत्पत्ति के साधनों की लागत का फलन होती है।

C = f ( o )

C = उत्पादन के साधनों की लागत f = फलन o = उत्पादन की मात्रा

Q.15 पूर्ति की लोच को प्रभावित या निर्धारित करने वाले तत्व /कारक या घटक लिखिए।

ANS. पूर्ति को प्रभावित करने वाले तत्व निम्नलिखित हैं-

1. वस्तु की कीमत -वस्तु की कीमत भी वस्तु की पूर्ति को प्रभावित करती है ऊंची कीमतों पर पूर्ति अधिक कम कीमत पर पूर्ति कम होती है।

2.अन्य संबंधित वस्तुओं की कीमत- स्थानापन्न एवं पूरक वस्तुओं की कीमतों में परिवर्तन का वस्तु की पूर्ति पर प्रभाव पड़ता है।

3.उत्पादन के साधनों की कीमत -वस्तु की पूर्ति उत्पादन के साधनों की कीमत को प्रभावित करती है। उत्पादन के साधनों की कीमत में वृद्धि से पूर्ति में कमी  एवं उत्पादन के साधनो में कमी से पूर्ति  में वृद्धि होती है।

4. तकनीकी ज्ञान-  तकनीकी ज्ञान से वस्तु की पूर्ति में वृद्धि होती है।

5. शासकीय नीति - करों में वृद्धि वस्तु की पूर्ति में कमी लाती है जबकि करों में कमी से वस्तु की पूर्ति में वृद्धि होती है।

6.भविष्य में कीमतों में परिवर्तन की संभावना- भविष्य में वस्तु की किंतु में होने वाले परिवर्तनों की संभावना भी वस्तु की पूर्ति को प्रभावित करती है।

Q.16 स्थिर लागत और परिवर्तनशील लागत में अंतर बताइए।

उत्तर

 

स्थिर लागत

परिवर्तनशील लागत

1

 इसका संबंध उत्पादन के स्थिर साधनों से होता है ।

 

इसका संबंध उत्पादन के परिवर्तनशील साधनों से होता है।

 

2

इसका संबंध अल्पकाल अवधि से है ।

 

इसका संबंध दीर्घकाल अवधि से है।

 

3

उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन का स्थिर लागतो पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता ।

 

उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन होने पर परिवर्तनशील लागते भी परिवर्तित हो जाती है।

 

4

उत्पादन स्तर के शून्य होने पर भी कुल स्थिर लागत अपरिवर्तित रहती हैं।

उत्पादन शून्य होने पर अल्पकाल में परिवर्तनशील लागते भी शुन्य हो जाती है।

 

5

स्थिर लागते कुल लागत में से परिवर्तनशील लागत को घटाने पर प्राप्त होती है।

 

परिवर्तनशील लागत है कुल लागत में से स्थिर लागत को घटाने पर प्राप्त होती है।

 

Q.17 उत्पादन फलन क्या है उत्पादन फलन की संकल्पना को समझाइए।

उत्तर - एक फर्म का उत्पादन फलन उपयोग में लाए गए आगतों

( साधनों) तथा फर्म द्वारा उत्पादित निर्गतों (वस्तु की

 उत्पादित

मात्रा)  के मध्य फलनात्मक संबंध को व्यक्त करता है।

उत्पादन फलन  Qx = f (A,B,C,D)

Qx = x वस्तु का भौतिक उत्पादन( निर्गत) Outputs

A,B,C,D उत्पत्ति के साधन (लागत) Inputs

वाटसन :- "एक फर्म भौतिक उत्पादन और उत्पादन के भौतिक साधनों के  संबंध को उत्पादन फलन कहा जाता  है।"

Q.18 लागत वक्र यू आकार के क्यों होते हैं?

Ans. अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र यू U” आकार

का इसलिए होता है , कि यह उत्पादन प्रतिफल की तीनों अवस्थाओं को बताता है ।

उत्पादन की प्रारंभिक अवस्था में उत्पत्ति की अन्य साधनों को स्थिर रखकर एक साधन की मात्रा को बढ़ाया जाता है , तो उत्पादन बढ़ती हुई दर से प्राप्त होता है । अर्थात सीमांत लागत घटती क्योंकि प्रारंभ में श्रम, तकनीकी , विपणन एवं प्रबंधकीय बचते प्राप्त होती है । एवं एक बिंदु पर सीमांत लागत न्यूनतम हो जाता है , उसके बाद ऊपर उठने लगता है । अर्थात प्रति इकाई सीमांत लागत बढ़ने लगती है जिसके कारण सीमांत लागत यू "U" आकार का हो जाता है।

Q.19 लागत वक्र की संकल्पनाओं को संक्षिप्त में समझाइए।

ANS. लागत संकल्पनाएं या अवधारणाएं

कुल लागत = कुल स्थिर लागत + कुल परिवर्तनशील लागत

औसत लागत = औसत स्थिर लागत + औसत परिवर्तनशील लागत

सीमांत लागत = एक अतिरिक्त इकाई से कुल लागत में होने वाली वृद्धि

Q.20 अल्पकाल और दीर्घकाल की संकल्पना ओं को समझाइए।

अल्पकाल क्या है?

दीर्घकाल क्या है?

उत्तर -

अल्पकाल - अल्पकाल वह समयावधि है जिसमें उत्पादन के सभी साधनों में परिवर्तन करना संभव नहीं होता ।

 अल्पकाल में उत्पत्ति के अन्य साधनों की मात्रा स्थिर रखकर एक साधन की मात्रा में परिवर्तन किया जाता है

दिर्घकाल - दीर्घकाल में उत्पत्ति के सभी साधन परिवर्तनशील हो जाते हैं ।

अर्थशास्त्र  में अल्पकाल को ज्यादा महत्व दिया जाता

है क्योंकि अल्पकाल में एक फर्म या उपभोक्ता के व्यवहार का अध्ययन किया जा सकता है ।

कि़स - " दिर्घकाल हम सब मर जाते हैं "

Q.21 परिवर्तनशील अनुपातों के नियम को समझाइए।

परिवर्तनशील अनुपात का नियम यह बताता है कि अल्पकाल में अन्य साधनों की मात्रा को स्थिर रखकर जब किसी एक साधन की मात्रा में परिवर्तन किया जाता है तो उत्पादन किस अनुपात में परिवर्तित होता है परिवर्तनशील अनुपात का नियम कहलाता है।

Q.22 साधन के प्रतिफल से क्या तात्पर्य है।

ANS. अल्पकाल में उत्पादन के कुछ साधन स्थिर होते

 हैं और कुछ साधन परिवर्तनशील इसलिए अल्पकाल में एक फर्म इस बात पर विशेष ध्यान देती है कि स्थिर साधनों के साथ जब परिवर्तनशील साधन की मात्रा में परिवर्तन होता है तब उसका उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

Q.23 पैमाने के प्रतिफल का अर्थ बताते हुए , इसकी अवस्थाओं के नाम लिखिए।

अथवा

पैमाने के प्रतिफल का नियम क्या है?

ANS. दीर्घकाल में उत्पादन के साधनों में समान

अनुपात में वृद्धि करने पर उत्पादन किस अनुपात में

बढ़ता है यही पैमाने के प्रतिफल का नियम बताता है।

अर्थात दिर्घकाल में पैमाने के प्रतिफल सभी साधनों में समान अनुपात में होने वाले परिवर्तनों के फलस्वरूप  कुल उत्पादन में होने वाले परिवर्तन से है।

पैमाने के प्रतिफल की तीन अवस्थाएं हैं:-

1.पैमाने के बढ़ते प्रतिफल

2.पैमाने के स्थिर प्रतिफल

3.पैमाने के घटते प्रतिफल

Q.24 औसत आगम और सीमांत आगम में संबंध बताइए।

उत्तर - पूर्ण प्रतियोगिता में औसत आगम और सीमांत

आगम के बीच संबंध

पूर्ण प्रतियोगिता में वस्तु की मांग पूर्णतया लोचदार होती है । क्योंकि पूर्ण प्रतियोगिता में फर्म कीमत प्राप्तकर्ता होती है। उद्योग द्वारा वस्तु का मूल्य निर्धारण किया जाता है और इस निर्धारित कीमत को दिया हुआ मानकर वस्तु की कितनी भी मात्रा का उत्पादन एवं विक्रय कर सकती है।

पूर्ण लोचदार मांग वाले पूर्ण प्रतियोगिता बाजार में औसत आगम एवं सीमांत आगम परस्पर बराबर होते हैं।

सूत्रानुसार AR = MR(e/e-1)
यदि e=°° (अनंत)
तब. AR = MR

अर्थात पूर्ण प्रतियोगिता में औसत आगम तथा सीमांत आगम परस्पर बराबर होते हैं अब यह रेखा x अक्ष के समानांतर एक आड़ी रेखा के रूप में होती है ।

9. साधन के प्रतिफल और पैमाने के प्रतिफल में अंतर स्पष्ट कीजिए ।

1. उत्तर अल्पकालीन उत्पादन फलन परिवर्तनशील अनुपात वाला उत्पादन फलन है जबकि दीर्घकालीन उत्पादन फलन पैमाने के प्रतिफल वाला उत्पादन फलन है।

2. अल्पकालीन उत्पादन फलन में उत्पादन पैमाना स्थिर होता है जबकि दीर्घकालीन उत्पादन फलन की स्थिति में पैमाना

परिवर्तित होता है।

4.अल्पकालीन उत्पादन फलन साधन के प्रतिफल को

5.प्रकट करता है जबकि दीर्घकालीन उत्पादन फलन पैमाने के प्रतिफल को प्रकट करता है।

Q.25 एक आगत (साधन) का कुल उत्पाद क्या होता है

 उत्तर - अन्य सभी आगतों (साधनों) की मात्रा को स्थिर रखकर जब एक साधन लागत की मात्रा में परिवर्तन किया जाता है, तब उस आदत के विभिन्न स्तरों पर प्रयोग के लिए उत्पादन फलन से विभिन्न स्तरों के उत्पादन प्राप्त होते हैं । परिवर्ती आगत (परिवर्तनशील साधन) और निर्गत के बीच के इस संबंध को कुल उत्पाद कहा जाता है।

 उदाहरण (तालिका)

Q.26 एक आगत (साधन )का औसत उत्पाद क्या होता है

उत्तर- परिवर्तनशील साधन के प्रति इकाई उत्पादन को औसत उत्पाद AP कहा जाता है। 

कुल उत्पाद TP में परिवर्तनशील लागत (साधन) से भाग देने पर औसत उत्पाद प्राप्त होता है।

सूत्र - AP = TP/L

AP = औसत उत्पाद 

TP = कुल उत्पाद

L = परिवर्तनशील साधन की मात्रा उदाहरण तालिका

Q.27 एक आगत (साधन) का सीमांत उत्पाद MP क्या होता है

उत्तर - अन्य साधनों की मात्रा को स्थिर रखकर परिवर्तनशील साधन की एक अतिरिक्त इकाई के प्रयोग से कुल उत्पादन की मात्रा( दर) में होने वाला परिवर्तन सीमांत उत्पाद MP कहा जाता

 है ।

MPn = TPn - TPn-1

MPn = n वी इकाई का सीमांत उत्पाद 

TPn = n इकाइयों का कुल उत्पाद 

TPn-1 = n-1 इकाइयों का कुल उत्पाद 

अन्य सूत्र 

MP = TP/L

कुल उत्पादन में परिवर्तन/

परिवर्तनशील साधन में परिवर्तन की इकाईयों में परिवर्तन

Q.28 ह्रासमान सीमांत उत्पाद का नियम क्या है

उत्तर ह्रासमान सीमांत उत्पाद अल्पकालीन सिद्धांत है जो परिवर्तनशील अनुपात के नियम की एक अवस्था है ।

अल्पकाल में उत्पत्ति के सभी साधन परिवर्तनशील नहीं होते। परिवर्तनशील साधन की मात्रा में निरंतर वृद्धि करने पर एक आदर्श सहयोग बिंदु के बाद सीमांत उत्पाद गिरने लगता है यह साधन की विभाज्यता एवं अन्य साधनों का स्थिर सहयोग के कारण होता है । 

परिभाषा 

स्टीगलर के अनुसार :- "जब कुछ उत्पत्ति साधनों को

स्थिर रखकर एक उत्पत्ति साधन की इकाइयों में समान वृद्धि की जाती है तब एक निश्चित बिंदु के बाद उत्पादन की उत्पन्न होने वाली वृद्धि कम हो जाएगी अर्थात सीमांत उत्पादन घट जाएगा।"

Q.29 उत्पादन फलन वर्धमान पैमाने के प्रतिफल को कब संतुष्ट करता है। पैमाने के बढ़ते प्रतिफल को समझाइए।

पैमाने के बढ़ते प्रतिफल

जब उत्पत्ति के साधनों को एक निश्चित मात्रा में बढ़ाया जाता है तो उत्पादन बढ़ती हुई दर से प्राप्त होता है। अर्थात साधन वृद्धि की दर से उत्पादन वृद्धि दर अधिक होती है।

उदाहरण अनुसार साधनों में 10% की वृद्धि की जाए तो उत्पादन में भी 10% से अधिक की वृद्धि हो जाएगी ।

चित्र

चित्रानुसार साधनों में 10% वृद्धि करने पर उत्पादन 13% बढ़ रहा है ।

उत्पादन में अनुपातिक वृद्धि > साधनों में अनुपस्थिति से अधिक है।

Q.30 एक उत्पादन फलन स्थिर पैमाने के प्रतिफल को कब संतुष्ट करता है।

उत्तर - पैमाने के प्रतिफल की अवधारणा दीर्घकालीन होती है । जिसमें उत्पत्ति के सभी साधन परिवर्तनशील है।

परिभाषा

वाटसन के अनुसार - "पैमाने के प्रतिफल का संबंध

सभी कारकों में समान अनुपात में होने वाले परिवर्तन के फलस्वरुप कुल उत्पादन में होने वाले परिवर्तन से है वह एक दीर्घकालीन अवधारणा है।"

    उत्पत्ति के साधनों में जब सामान रूप से वृद्धि की जाती है तो उत्पादन भी समान रूप से ही बढ़ता है इसे स्थिर पैमाने के प्रतिफल कहते हैं।

चित्र



Q.31 एक उत्पादन फलन ह्रासमान पैमाना के प्रतिफल को कब संतुष्ट करता है। OR पैमाने के घटते प्रतिफल को समझाइए।

ANS. पैमाने के घटते प्रतिफल

जब उत्पत्ति के साधनों को एक निश्चित मात्रा में बढ़ाया जाता है तो उत्पादन घटती हुई दर से बढ़ता है।

 अर्थात साधन वृद्धि दर से उत्पादन वृद्धि की दर कम होती है ।

उत्पादन में अनुपातिक वृद्धि > साधनों में अनुपातिक वृद्धि

चित्र



 चित्र अनुसार साधनों में 10% वृद्धि करने पर उत्पादन में 5% की वृद्धि होती है।

Q.32 परिवर्ती (परिवर्तनशील) अनुपात का नियम क्या

 है? या Explain the low of Variableproportionals. परिवर्ती अनुपातों के नियम की तीन अवस्थाओं की व्याख्या कीजिए चित्र का प्रयोग करें।

या

पैमाने के बढ़ते प्रतिफल को समझाइए। या

पैमाने के घटते प्रतिफल को समझाइए। या

पैमाने के समान प्रतिफल को समझाइए

परिवर्तनशील अनुपात का नियम अल्पकाल से संबंधित है ।अल्पकाल में अन्य साधनों की मात्रा को स्थिर रखकर जब किसी एक साधन की मात्रा में वृद्धि की जाती है तो उत्पादन की तीन अवस्थाएं प्राप्त होती है।

 प्रथम अवस्था में उत्पत्ति वृद्धि नियम क्रियाशील रहता है।

जिसमें सीमांत उत्पादन तेजी से बढ़ता है ।

दूसरी अवस्था को उत्पत्ति स्थिर( समता )नियम कहा जाता है जिसमें सीमांत उत्पादन बढ़ता है मगर घटती दर से।

 तृतीय अवस्था को उत्पत्ति ह्रास नियम भी कहा जाता है जिसमें सीमांत उत्पादन mp ऋणात्मक हो जाती हैं।

चित्रद्वारा प्रदर्शन

प्रथम अवस्था या बढ़ते प्रतिफल की अवस्था

प्रथम अवस्था वहां तक होगी जहां AP, MP बराबर होंगे अर्थात परिवर्तनशील साधन की औसत उत्पादकता बढ़ती है। ON मात्रा तक और सीमांत उत्पादकता धनात्मक रहती है और AP से अधिक रहती हैं ।

प्रारंभ में परिवर्तनशील साधन की मात्रा कम होने से उसका पूर्ण दोहन नहीं होता और साधन अविभाज्यत होता है जिससे परिवर्तन संसाधन की मात्रा में वृद्धि से बढ़ती हुई दर से उत्पादन प्राप्त होता है

द्वितीय अवस्था या घटते प्रतिफल की अवस्था

इस अवस्था में