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12वी समष्टि अर्थशास्त्र PDF SOLUTION (MACRO ECONOMICS IN HINDI )

 12वी समष्टि अर्थशास्त्र सम्पूर्ण हल, समष्टि अर्थशास्त्र की सभी इकाइयों का हल, परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्नउत्तर, पेपर, NCERT MACRO ECONOMICS SOLUTION IN HINDI 

UNIT – 1  समष्टि अर्थशास्त्र परिचय

Q.1 समष्टि अर्थशास्त्र का क्या आशय है?

उत्तर - समष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ

समष्टि अर्थशास्त्र, अर्थशास्त्र के आर्थिक विश्लेषण की वह शाखा है, जो जिसमें अर्थव्यवस्था के बड़े भागों का अध्ययन किया जाता है। अर्थात इसके अंतर्गत ऐसे विशाल समूह का अध्ययन किया जाता है जो संपूर्ण अर्थव्यवस्था को प्रदर्शित करते हैं जैसे

कुल रोजगार , कुल आय , कुल उत्पादन, कुल विनियोग

, कुल बचत , कुल उपभोग , कुल पूर्ति, कुल मांग ,

सामान्य कीमत स्तर इत्यादि।

Q.2 समष्टि अर्थशास्त्र की परिभाषा लिखिए।

समष्टि अर्थशास्त्र की परिभाषा

प्रोफेसर बोल्डिंग के अनुसार :- व्यापक अर्थशास्त्र व्यक्तिगत मात्राओं का अध्ययन नहीं करता बल्कि इन मात्राओं के समूह का अध्ययन करता है, व्यक्तिगत आयों का नहीं अपितु राष्ट्रीय आय का ; व्यक्तिगत कीमतों का नहीं बल्कि सामान्य कीमत स्तर का ; व्यक्तिगत उत्पादन का नहीं बल्कि राष्ट्रीय उत्पादन का।"

Q.3 समष्टि अर्थशास्त्र में किन मुद्दों का विवेचन किया जाता है? अर्थात समष्टि अर्थशास्त्र में किसका अध्ययन किया जाता है?

समष्टि अर्थशास्त्र में अर्थव्यवस्था के बड़े भागों का अध्ययन किया जाता है। अर्थात इसके अंतर्गत ऐसे विशाल समूह का अध्ययन किया जाता है जो संपूर्ण अर्थव्यवस्था को प्रदर्शित करते हैं जैसे

कुल रोजगार , कुल आय , कुल उत्पादन, कुल विनियोग , कुल बचत , कुल उपभोग , कुल पूर्ति, कुल मांग , सामान्य कीमत स्तर ,  सामूहिक मांग और सामूहिक पूर्ति , राष्ट्रीय आय, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार , बचत,  विदेशी विनिमय भुगतान  आदि के विस्तृत अध्ययन में सहायक इत्यादि।

Q.4 पूंजीगत वस्तुएं क्या होती है?

पूंजीगत वस्तुओं से आशय स्थाई संपत्तियों से है जैसे यंत्र एवं मशीनरी आदि जिनका उपयोग उत्पादक उत्पादन प्रक्रिया के लिए बार-बार वर्षों तक करता रहता है पूंजीगत वस्तुएं सदैव ऊंचे मूल्य वाली होती है।

Q.5 उपभोक्ता वस्तुओं से आप क्या समझते हैं?

उपभोग वस्तुएं

उपभोक्ता वस्तुएं उन वस्तुओं को कहते हैं जिनका मानवीय आवश्यकता की संतुष्टि के लिए सीधा उपयोग किया जाता है । उदाहरण के लिए रेडियो ,टेलीविजन , मोबाइल, स्कूटर, वाशिंग मशीन ,कपड़े ,फर्नीचर ,दूध, ब्रेड आदि।

Q.6 अंतिम वस्तुओं का क्या आशय है?

अंतिम वस्तुओं का अभिप्राय उन वस्तुओं से है जिनका प्रयोग

उपभोक्ता द्वारा होता है और उन्हें फर्मों द्वारा उत्पादन

 प्रक्रिया में कच्चे माल अर्थात आगत के रूप में प्रयोग नहीं किया जाता बल्कि प्रत्यक्ष रूप में घरेलू क्षेत्र में उपयोग किया जाता है राष्ट्रीय आय की गणना में अंतिम वस्तुओं की गणना ही शामिल की जाती है।

Q.7 मध्यवर्ती वस्तुओं का क्या आशय है ?

मध्यवर्ती वस्तु एक फर्म का ऐसा उत्पाद है जिसे दूसरी वस्तु की उत्पादन प्रक्रिया में कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है । ऐसी वस्तुओं को राष्ट्रीय आय की गणना में सम्मिलित नहीं किया जाता।

Q.8 स्टॉक चर से क्या है?

स्टॉक चर की परिभाषा दीजिए ।

स्टॉक चर का उदाहरण बताइए।

स्टॉक चर का अर्थ

स्टॉक चर का अर्थ किसी एक विशेष समय बिंदु पर माफी जाने

वाली आर्थिक चर की मात्रा है।

✍️स्टॉक का कोई समय परिमाप नहीं होता ।

✍️स्टॉक एक स्थैतिक अवधारणा है।

अर्थशास्त्र की कुछ अवधारणाओं का स्टॉक से संबंधित पहलू नहीं होता जैसे- आयात निर्यात।

स्टॉक की परिभाषा

प्रोफेसर शपीरो के अनुसार - "स्टॉक वह मात्रा है जिसकी माप समय के निर्दिष्ट बिंदु पर की जाती है।"

स्टॉक चर का उदाहरण दीजिए।

स्टॉक चर का उदाहरण

मुद्रा की मात्रा, श्रम बल, देश की जनसंख्या ,गोदाम में रखा गया गेहूं आदि।

Q.9 प्रवाह चर किसे कहते हैं? प्रवाह चर की परिभाषा दीजिए। प्रवाह चर का उदाहरण बताएं

प्रवाह चर का अर्थ

प्रवाह का अर्थ एक आर्थिक चर की वह मात्रा है जिसे किसी समय अवधि के दौरान मापा जाता है।

प्रवाह का समय परिमाप होता है जैसे प्रति घंटा, प्रतिदिन ,प्रति माह ,प्रति वर्ष आदि।

प्रवाह एक गत्यात्मक अवधारणा है

आयात निर्यात को केवल प्रवाह अवधारणाओं के रूप में ही प्रयोग किया जाता है।

प्रवाह चर की परिभाषा

प्रोफेसर शपीरो के अनुसार - "प्रवाह वह मात्रा है जो कि केवल समय के एक निर्दिष्ट काल में मापी जा सकती है।"

प्रवाह चर का उदाहरण

 नदी का जल , चलती गाड़ी की गति ,पानी की टंकी से रिसाव , गेहूं का विक्रय आदि।

Q.10 मौद्रित प्रवाह किसे कहते हैं?

मौद्रिक प्रवाह का आशय उत्पादक फर्मों से ग्राहकों को साधन की

सेवा के बदले किए जाने वाले भुगतान से है तथा उपभोग व्यय के रूप में ग्राहकों से उत्पादक धर्मों को वस्तुओं तथा सेवाओं के तरह के रूप में किए जाने वाले भुगतान से है । अर्थात उत्पादकों से गृहस्थों,  से

उत्पादकों को होने वाला भुगतान मौद्रिक प्रवाह है।

Q.11 भौतिक प्रवाह क्या होता है? या वास्तविक प्रवाह से आप क्या समझते हैं?

भौतिक प्रवाह या वास्तविक प्रवाह से आशय साधनों की सेवाओं का गृहस्थों   की ओर से उत्पादक फर्मों की ओर जाना तथा माल तथा सेवाओं का प्रवाह उत्पादक फर्मों से गृहस्थों  की और आना उसे भौतिकी या वास्तविक प्रवाह कहा जाता है।

Q.12 सकल विनियोग किसे कहते हैं?

सकल विनियोग से आशय वर्ष में स्थाई संपत्तियों के क्रय तथा स्टॉक पर किया गया व्यय है।  इनमें उन संपत्तियों के क्रय की राशि भी शामिल है जो नष्ट हुई या प्रयोग से बाहर हुई संपत्तियों के स्थान पर खरीदी

गई है। ह्रास के कारण स्थाई संपत्ति का

प्रतिस्थापन भी सकल विनियोग का ही एक अंग है।

Q.13 शुद्ध विनियोग का अर्थ क्या है?

शुद्ध विनियोग से तात्पर्य स्थाई संपत्ति में अगर कोई ह्रास या घिसावट के कारण प्रतिस्थापन व्यय होता है तो उसे सकल विनियोग से घटा देने पर शेष बची हुई राशि शुद्ध विनियोग कहलाती है। शुद्ध विनियोग पूंजी के स्टॉक में वृद्धि करता है।

 शुद्ध विनियोग= सकल विनियोग - ह्रास

Q.14 ह्रास किसे कहते हैं? ह्रास या घिसावटवट व्यय क्या है?

उत्पादन प्रक्रिया के दौरान स्थाई परिसंपत्तियों में होने वाली टूट-फूट या घिसावट आदि मूल्य ह्रास कहलाती है।

यह सामान्य टूट-फूट दुर्घटनाजन्य हो सकती है।

Q.15 सकल विनियोग तथा शुद्ध विनियोग में अंतर स्पष्ट कीजिए।

फर्म अथवा अर्थव्यवस्था द्वारा उत्पादकीय उपकरणों पर

किया गया कुल व्यय सकल विनियोग को बताता है , यदि हम सकल विनियोग में से गिरावट अथवा मूल्य ह्रास घटा दे तो हमें शुद्ध विनियोग प्राप्त होता है। सकल विनियोग कभी भी ऋणात्मक नहीं होता।

सकल विनियोग = शुद्ध विनियोग + ह्रास

शुद्ध विनियोग = सकल विनियोग - ह्रास

Q.16 समष्टि अर्थशास्त्र का क्या महत्व है ? लिखिए।

समस्ती अर्थशास्त्र का महत्व निम्नलिखित हैं-

✍️1. संपूर्ण अर्थव्यवस्था के अध्ययन में सहायक

✍️2. आर्थिक नीतियों के निर्माण में सहायक

✍️3.  आर्थिक विकास का अध्ययन

✍️4. मौद्रिक समस्याओं जैसे मुद्रा प्रसार एवं मुद्रा संकुचन का अध्ययन एवं विश्लेषण

✍️5.  योजनाओं के निर्माण में सहायक

✍️6. सामूहिक व्यवहारों का मूल्यांकन संभव

✍️7.  साधनों के वितरण में महत्व

✍️8. व्यष्टि अर्थशास्त्र के विकास में सहायक

✍️9. आर्थिक समस्याओं जैसे गरीबी ,बेरोजगारी आदि के समाधान में सहायक

✍️10.  सामूहिक मांग और सामूहिक पूर्ति , कीमत स्तर

 , राष्ट्रीय आय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार , बचत,  विदेशी विनिमय भुगतान  आदि के विस्तृत अध्ययन में सहायक।

Q.17 समष्टि अर्थशास्त्र की सीमाओं को समझाइए।

1. निष्कर्ष व्यावहारिक नहीं  होते - समष्टि अर्थशास्त्र के द्वारा प्राप्त निष्कर्षों प्रायः व्यवहारिक नहीं होते।

2. व्यक्तिगत इकाइयों की उपेक्षा - समष्टि अर्थशास्त्र अपने विश्लेषण में व्यक्तिगत इकाइयों की उपेक्षा करता है।

3. समूह की संरचना पर बल नहीं - समष्टि अर्थशास्त्र छोटी छोटी इकाइयों की बनावट और संरचना की उपेक्षा करता है।

4. सही प्रतिनिधित्व नहीं - सामूहिक मात्राएं व्यक्तिगत

मात्राओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं करती है।

Q.18 समष्टि अर्थशास्त्र की विशेषताएं लिखिए।

1. व्यापक दृष्टिकोण - समष्टि अर्थशास्त्र में राष्ट्रीय विश्व स्तरीय आर्थिक समस्याओं का हल ढूंढा जाता है सूक्ष्मा चारों का नहीं।

2. गतिशील अर्थव्यवस्था को महत्व - समष्टि अर्थशास्त्र गतिशील अर्थव्यवस्था को अधिक महत्व प्रदान करता है।

3. व्यापक विश्लेषण - समष्टि अर्थशास्त्र में व्यापक विश्लेषण पर विशेष बल दिया जाता है इसमें सरकार के मौद्रिक एवं राजकोषीय नीतियों के प्रभाव की विवेचना की जाती है।

4. सामूहिक हितों पर बल - समष्टि अर्थशास्त्र में

व्यक्ति की अपेक्षा समूह पर अधिक ध्यान दिया जाता है।

5. परस्पर निर्भरता - व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र में परस्पर निर्भरता है।

Q.19 उपभोक्ता वस्तुओं तथा पूंजीगत वस्तुओं में क्या अंतर है? समझाइए।

उपभोक्ता वस्तुएं

उपभोक्ता वस्तुएं उन वस्तुओं को कहते हैं जिनका मानवीय आवश्यकता की संतुष्टि के लिए सीधा उपयोग किया जाता है । उदाहरण के लिए रेडियो ,टेलीविजन , मोबाइल, स्कूटर, वाशिंग मशीन ,कपड़े ,फर्नीचर ,दूध, ब्रेड आदि।

पूंजीगत वस्तुएं

पूंजीगत वस्तुओं से आशय स्थाई संपत्तियों से है जैसे यंत्र एवं मशीनरी आदि जिनका उपयोग उत्पादक उत्पादन प्रक्रिया के लिए बार-बार वर्षों तक करता रहता है पूंजीगत वस्तुएं सदैव ऊंचे मूल्य वाली होती है।

Q.20 अर्थव्यवस्था के चार क्षेत्र क्या है ? अंतर क्षेत्रीय प्रवाह को समझाइए। या आय का चार क्षेत्रिय मॉडल

अर्थव्यवस्था के चार क्षेत्र

1. गृहस्थ क्षेत्र - वस्तुओं तथा सेवाओं के उपभोक्ताओं को इस क्षेत्र में शामिल किया जाता है। इसे उत्पत्ति के साधनों के स्वामी भी कहते हैं । माल तथा सेवा की पूर्ति इनके द्वारा उत्पादकों को की जाती है।

2. उत्पादक क्षेत्र -  अर्थव्यवस्था में सभी उत्पादक इकाइयां तथा फर्में में इस क्षेत्र में शामिल है। उत्पत्ति के साधनों या उत्पादन हेतु  यह गृहस्थ  क्षेत्र पर निर्भर है।

3. सरकारी क्षेत्र - कल्याणकारी एजेंसी के रूप में तथा उत्पादक के रूप में भी सरकार शामिल होती है तथा कर तथा गैर कर आगम के लिए सरकारी क्षेत्र उत्पादकों और गृहस्थ पर निर्भर करता है।

4. शेष विश्व क्षेत्र - इस क्षेत्र में वस्तुओं तथा सेवाओं के निर्यात - आयात पर घरेलू क्षेत्र एवं शेष विश्व के बीच पूंजी के प्रवाह से संबंधित गतिविधियों को शामिल किया जाता है।

Q.21 स्टॉक चर एवं प्रवाह चर में अंतर बताइए

स्टॉक एवं प्रवाह में अंतर लिखिए

स्टॉक चर एवं प्रवाह चर में अंतर

स्टॉक चर

प्रवाह चर

✍️1. स्टॉक का अर्थ किसी एक विशेष समय बिंदु पर माफी जाने वाली आर्थिक चर की मात्रा है।

 

प्रवाह का अर्थ एक आर्थिक चर की वह मात्रा है जिसे किसी समय अवधि के दौरान मापा जाता है।

✍️2. स्टॉक का कोई समय परिमाप नहीं होता ।

 

प्रवाह का समय परिमाप होता है जैसे प्रति घंटा, प्रतिदिन ,प्रति माह ,प्रति वर्ष आदि।

 

✍️3. स्टॉक एक स्थैतिक अवधारणा है।

 

प्रवाह एक गत्यात्मक अवधारणा है

 

✍️4. अर्थशास्त्र की कुछ अवधारणाओं का स्टॉक से संबंधित पहलू नहीं होता जैसे- आयात निर्यात।

 

आयात निर्यात को केवल प्रवाह अवधारणाओं के रूप में ही प्रयोग किया जाता है।

 

 

 

Q.22 आय का चक्रीय प्रवाह के तीन क्षेत्रों का नाम लिखिए।

रिसाव का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

UNIT – 2 राष्ट्रीय आय का लेखांकन

Q.1 सकल राष्ट्रीय उत्पाद से आप क्या समझते हैं? बाजार मूल्य पर

बाजार कीमत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद किसी देश की अर्थव्यवस्था में एक वित्तीय वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का बाजार मूल्य जिसमें विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय को भी शामिल किया जाता है।

Q.2 आय का चक्रीय प्रवाह क्या है?

आय के चक्रीय प्रवाह से तात्पर्य उस प्रक्रिया से हैं जिसके अंतर्गत किसी अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय आज चक्राकार रूप में निरंतर एक अर्थिक क्षेत्र से दूसरे आर्थिक क्षेत्र की और प्रवाहित होती है।

Q.3 सकल घरेलू आय तथा सकल राष्ट्रीय आय में अंतर

लिखिए। GDP और GNP में अंतर

                      GDP

                   GNP

1. जीडीपी देश के घरेलू क्षेत्र में उत्पादित सभी अंतिम वस्तु एवं सेवाओं का मौद्रिक मूल्य होती है।

जीएनपी देश में सामान्य निवासियों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं सेवाओं का बाजार मूल्य होती है।

 

2. जीडीपी एक क्षेत्रीय घरेलू धारणा है जो देश की घरेलू सीमा तक ही सीमित है।

जीएनपी एक राष्ट्रीय धारणा है जिसका संबंध देश के सामान्य निवासियों से होता है।

 

3. जीडीपी में शुद्ध विदेशी साधन आय शामिल नहीं होता।

जीएनपी में शुद्ध विदेशी साधना आय शामिल होती है।

 

जीएनपी में शुद्ध विदेशी साधना आय शामिल होती है।

 

4. जीडीपी एक संकुचित धारणा है।

 

जीएनपी एक विस्तृत धारणा है।

 

Q. 4 राष्ट्रीय आय की गणना की विधियां लिखिए

राष्ट्रीय आय की मापन की विधियां बताइए

उत्तर राष्ट्रीय आय मापन की रीतियां निम्नलिखित है

✍️1. उत्पाद अथवा मूल्यवृद्धि विधि

✍️2. आय विधि

✍️3. व्यय विधि

उत्पाद अथवा मूल्यवृद्धि विधि -

यह वह विधि है जो एक लेखा वर्ष में देश की घरेलू सीमा

के अंदर प्रत्येक उत्पादक उद्यम द्वारा उत्पादन में किए गए योगदान की गणना करके राष्ट्रीय आय को मापती है।

उत्पाद मूल्य एक लेखा वर्ष के दौरान किसी फर्म द्वारा उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं का बाजार मूल्य होता है।

आय विधि -

इस विधि के अंतर्गत उत्पादन के विभिन्न साधनों द्वारा उनकी सेवा के प्रतिफल के रूप में अर्जित किए जाने वाले भुगतान या साधनों की आय का योग किया जाता है। इस योग में विदेशों से अर्जित शुद्ध आय को भी जोड़ दिया जाता है

व्यय विधि

व्यय विधि वह विधि है जिसके द्वारा एक लेखा वर्ष में बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद पर किए गए अंतिम व्यय को मापा जाता है। यह अंतिम व्यय बाजार कीमत पर

 सकल घरेलू उत्पाद के बराबर होता है।

Q.5 मिश्रित आय किसे कहते हैं ?

मिश्रित आय क्या है

उत्तर - मिश्रित आय का अर्थ

उत्पादन कार्य को संपन्न करने वाले स्व नियोजित की

मिश्रित आय में श्रमिकों की कुल आय और मध्यवर्ती उद्योगों की अर्जित आय सम्मिलित होती है । यहां आशिक रूप से श्रम आय और आंशिक रूप से पूंजी आय को शामिल किया जाता है।

Example

इसके अंतर्गत - किसान , दुकानदार , शिक्षक, लोहार , सुतार , दर्जी, डॉक्टर आदि को प्राप्त होने वाली आय को मिश्रित आय माना जाता है।

Q.6 व्यक्तिगत आय क्या है ? व्यक्तिगत आय की गणना

कैसे की जाती है

व्यक्तिगत आय का अर्थ

व्यक्तिगत आय से आशय उस ऐसे हैं जो किसी देश में

 1 वर्ष की अवधि में व्यक्तियों अथवा परिवारों द्वारा

वास्तविक रूप से प्राप्त होती है।

व्यक्तिगत आय किसी राष्ट्र में एक वर्ष में प्राप्त सभी स्रोतों से आय हैं । जिसमें भुगतान किए गए करो को भी शामिल किया जाता है। व्यक्तिगत आय राष्ट्रीय आय के बराबर नहीं होती क्योंकि इसमें हस्तांतरित भुगतान शामिल किए जाते हैं। हस्तांतरित भुगतानों को राष्ट्रीय आय की गणना में शामिल नहीं किया जाता है।

Q.7 व्यक्तिगत आय की गणना कैसे की जाती है?

 व्यक्तिगत आय की गणना

✍️आय की गणना हेतु राष्ट्रीय आय में घटाई जोड़ी जाने

वाली मदें

✍️राष्ट्रीय आय में घटाई जाने वाली मदें

✍️निगम आयकर ,निगमों का वितरित लाभ ,सामाजिक सुरक्षा कटौतियां

✍️राष्ट्रीय आय में जोड़ी जाने वाली मदें

✍️राष्ट्रीय आय में कटौती यों के घटने के बाद व्यक्तियों को हस्तांतरण भुगतान को जोड़ दिया जाता है ।जैसे - पेंशन , बेरोजगारी भत्ता , छात्रवृत्ति आदि।

Q.8 सकल घरेलू उत्पाद क्या है ? GDP किसे कहते है what is gross domestic product

जीडीपी क्या है?

बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद क्या है?

सकल घरेलू उत्पाद का अर्थ

सामान्यतः एक राष्ट्र में एक वित्तीय वर्ष में उत्पादित

समस्त अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का मौद्रिक मूल्य सकल घरेलू उत्पाद कहलाता है । जिसमें उपभोक्ता एवं पूंजीगत दोनों प्रकार की वस्तुएं शामिल होती है।

सकल घरेलू उत्पाद में मूल्य ह्रास का मूल्य भी शामिल होता है।

अन्य रूप में सकल घरेलू उत्पाद को ऐसे भी परिभाषित किया जा सकता है

एक लेखा वर्ष में किसी देश की घरेलू सीमा में सभी उत्पादक को सामान्यतः निवासियों एवं गैर निवासियों द्वारा जितनी भी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन होता है उनकी बाजार कीमत के जोड़ को बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद कहां जाता है।

Q.9 आर्थिक कल्याण किसे कहते हैं? आर्थिक कल्याण की परिभाषा दीजिए।What is economic welfare?

उत्तर  आर्थिक कल्याण का अर्थ

अर्थशास्त्र में कल्याण से तात्पर्य मनुष्य समाज को प्राप्त होने

वाली उन भौतिक सुख सुविधाओं से है जिनके उपभोग से

मानसिक सुख की प्राप्ति होती है।

अर्थशास्त्री पीगू ने कल्याण को दो भागों में विभाजित किया है।

1. आर्थिक कल्याण

2. अनार्थिक कल्याण।

आर्थिक कल्याण की परिभाषा

प्रोफेसर पीगू के अनुसार - " आर्थिक कल्याण मानव

कल्याण का वह अंश है जिसको मुद्रा के मापदंड द्वारा मापा जा सकता है आर्थिक कल्याण कहलाता है।"

Q.10 मूल्य ह्रास क्या है? मूल्य ह्रास की गणना कैसे की जाती है?

उत्तर मूल्य ह्रास का अर्थ

मूल्यह्रास उत्पादन की प्रक्रिया में मशीनों, उपकरणों, पूंजीगत परिसंपत्तियों में सामान्य टूट-फूट और कल पुर्जों के घिसने के मूल्य में कमी आ जाती है। पूंजीगत वस्तुओं के मूल्य में यह कमियां आकस्मिक रूप से दुर्घटनावस प्रचलन के कारण हो सकती हैं।

मूल्यह्रास की गणना

शुद्ध विनियोग =  कुल विनियोग  -  मूल्य ह्रास

शुद्ध विनियोग की गणना में मूल्य ह्रास  को घटा

दिया जाता है।

Q.11 खुली अर्थव्यवस्था क्या है खुली अर्थव्यवस्था की परिभाषा दीजिएWhat is open economy

उत्तर खुली अर्थव्यवस्था का अर्थ

खुली अर्थव्यवस्था ऐसी अर्थव्यवस्था है जिसका संबंध आर्थिक रूप से दुनिया के अन्य देशों के साथ होता है। अर्थात किसी ऐसे देश की अर्थव्यवस्था जो अन्य देशों से आयात निर्यात का लेनदेन, उपहारों का आदान-प्रदान तथा अन्य प्रकार के भुगतान ओं को संपन्न करती हैं । खुली अर्थव्यवस्था कहलाती है।

वर्तमान परिदृश्य में आज विश्व में कोई भी अर्थव्यवस्था बंद नहीं है। अर्थात प्रत्येक अर्थव्यवस्था का दूसरे देशों या शेष विश्व  से आर्थिक लेनदेन का

संबंध है।

Q.12 प्रति व्यक्ति आय क्या है? प्रति व्यक्ति आय की परिभाषा दिजिए

उत्तर प्रति व्यक्ति आय का अर्थ

प्रति व्यक्ति आय एक देश की प्रति व्यक्ति औसत आय होती है जब किसी देश की कुल राष्ट्रीय आय में वहां की जनसंख्या का भाग दे दिया जाता है तो उस देश की प्रति व्यक्ति आय ज्ञात हो जाती है।

आर्थिक विकास के मापदंडों के रूप में अर्थशास्त्री प्रति व्यक्ति आय का प्रयोग करते हैं।

Q.13 प्रति व्यक्ति आय कैसे ज्ञात की जाती है?

प्रति व्यक्ति आय जानने का सूत्र

   प्रति व्यक्ति आय                   

Q.14 राष्ट्रीय आय का अर्थ लिखिए राष्ट्रीय आय की परिभाषा दीजिए

राष्ट्रीय आय क्या है

उत्तर राष्ट्रीय आय का अर्थ

राष्ट्रीय आय किसी राष्ट्र की सामान्यतः एक वित्तीय वर्ष में उत्पादित समस्त अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है। जिसमें वस्तुओं सेवाओं के प्रयोग में लाई गई मशीनों का मूल्य ह्रास घटा दिया जाता है।

जबकि विदेशों से प्राप्त शुद्ध आय को जोड़ दिया जाता है।

राष्ट्रीय आय की परिभाषा

प्रोफेसर मार्शल के अनुसार - "किसी देश में पूंजी और श्रम मिलकर प्राकृतिक साधनों पर कार्य कर के प्रति वर्ष कुछ भौतिक तथा भौतिक वस्तुएं उत्पन्न करते हैं, जिनमें सभी प्रकार की सेवाएं सम्मिलित हैं। इन सब वास्तविक उत्पादन का योग उस देश की शुद्ध राष्ट्रीय आय कहलाती है।"

प्रोफेसर पीगू के अनुसार - "राष्ट्रीय आय किसी देश की वास्तविक आय का वह भाग है, जिसे मुद्रा में मापा जा सकता है। इसमें विदेशों से प्राप्त आय भी शामिल रहती

हैं।"

Q.15 दोहरी गणना क्या है? उदाहरण सहित समझाइए। दोहरी गणना से कैसे बचा जा सकता है?

दोहरी गणना की समस्या क्या है?

उत्तर दोहरी गणना का अर्थ

राष्ट्रीय आय के मापन में किसी वस्तु या सेवा का

मूल्य एक से अधिक बार शामिल करना दोहोरी गणना कहलाता है।

राष्ट्रीय आय के आकलन में एक वस्तु के मूल्य की गणना जब एक बार से अधिक होती है तो उसे दोहोरी करना कहते हैं। इसके फलस्वरुप राष्ट्रीय उत्पाद में अनावश्यक रूप से वृद्धि हो जाती है।

दोहरी गणना को उदाहरण सहित समझाइए।

एक किसान गेहूं का उत्पादन करता है तथा उसे एक आटा

मिल को भेजता है किसान के लिए गेहूं की बिक्री अंतिम है।

किसान गेहूं बेचकर ₹5000 प्राप्त करता है उसका गेहूं के उत्पादन

 पर कोई खर्च नहीं होता । इस प्रकार किसान का

₹5000 के

बराबर मूल्य वृद्धि में योगदान किया।

किंतु आटा बनाने वाली मिल के लिए गेहूं एक मध्यवर्ती वस्तु है । आटा मिल गेहूं को मैदा में बदलकर बेकरी वाले को 8000 में बेचती है ।

आटा मिल के लिए मैदा अंतिम वस्तु है। मगर बेकरी वाले के लिए वहां मध्यवर्ती वस्तु है ।

बेकरी वाला डबल रोटी बनाकर दुकानदार को 10,500 में बेचता है। बेकरी वाले के लिए डबल रोटी अंतिम वस्तु हैं किंतु दुकानदार के लिए मध्यवर्ती वस्तु है ।

दुकानदार ने डबल रोटी को उपभोक्ताओं को 12000 में बेचा।

उत्पादन का मूल्य = 5000₹ + 8000₹ + 10500₹ +

12000₹ = 35000 कुल मूल्य।

दिए गए उदाहरण में गणना में प्रत्येक स्तर पर पिछली मूल्य वृद्धि को शामिल किया है। मैंदे के मूल्य में गेहूं का मूल्य , डबल रोटी के मूल्य में गेहूं का मूल्य तथा आटा मिल की सेवा मूल्य शामिल है । अंत में दुकानदार के द्वारा बेची गई डबल रोटी के मूल्य में गेहूं का मूल्य , आटे मील और बिक्री वालों की सेवाओं का मूल्य शामिल है । इस प्रकार गेहूं का मूल्य चार बार जोड़ा गया है ।

आटा मिल की सेवा को तीन बार , बेकरी की सेवा को दो बार गणना में शामिल किया गया।

अतः एक ही वस्तु के मूल्य की गणना कई बार हो रही

 है, जो राष्ट्रीय उत्पाद में अत्यधिक वृद्धि कर देगी जो

 सही नहीं हैं।

Q.16 राष्ट्रीय आय में दोहरी गणना को रोकने के उपाय बताइए।

दोहरी गणना की समस्या से कैसे बचा जाए।

✍️राष्ट्रीय आय में दोहरी गणना से बचने के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं का अंतिम मौद्रिक मूल्य शामिल किया जाए।

✍️अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न राष्ट्रीय आय मापन की विधियों का प्रयोग किया जाए।

✍️दोहरी गणना से बचने के लिए अंतिम उत्पाद विधि एवं मूल्य

वृद्धि विधि दोनों का प्रयोग किया गया।

✍️मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्यों को मूल्यवृद्धि में

शामिल नहीं करना चाहिए।

✍️पुरानी वस्तुओं के क्रय विक्रय को गणना में शामिल नहीं करना चाहिए।

Q.17 किसी देश के कल्याण के निर्देशांक के रूप में सकल घरेलू उत्पाद की कुछ सीमाओं को लिखो।

उत्तर - किसी देश के आर्थिक कल्याण के सूचक के रूप में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के कुछ व्यवहारिक सीमाएं हैं जो निम्नलिखित हैं :-

1. जीडीपी में वृद्धि किसी भी देश के जीवन स्तर में वृद्धि को अनिवार्य रूप से प्रदर्शित नहीं करती  जनसंख्या में तीव्र वृद्धि से आर्थिक कल्याण कमतर रहेगा।

2. जीडीपी में वृद्धि के दौरान कुछ ही लोगों की आय

बढ़ रही हो तो यह आर्थिक कल्याण को ठीक से माप नहीं करती।

3. वस्तु विनिमय का आकलन मुद्रीक अर्थव्यवस्था में नहीं

हो पाता जिससे जीडीपी का सही से माप नहीं हो पाता।

4. जीडीपी की माप में अन्य घटकों  जैसे :- प्रदूषण,  खनिज पदार्थों का अत्यधिक दोहन आदि का आकलन नहीं हो पाता।

Q.18 व्यय योग्य वैयक्तिक आय क्या है?

वैयक्तिक आय = राष्ट्रीय आय - निगम कर - अवितरित व्यवसायिक लाभ -  सामाजिक सुरक्षा अंशदान + अंतरंण भुगतान

Q.19 प्रति व्यक्ति आय से आप क्या समझते हैं?

प्रति व्यक्ति आय किसी राष्ट्र की औसत आय होती है अर्थात उस राष्ट्र की कुल आय में जनसंख्या का भाग देने पर उस राष्ट्र की प्रति व्यक्ति आय प्राप्त हो जाती है।

उदाहरण के लिए भारत की 2011 में कुल राष्ट्रीय आय साठ

 लाख करोड रुपए थी तथा जनसंख्या 120 करोड़ थी जिससे

 प्रति व्यक्ति आय ₹50000 होगी।

Q.20 साधन आय से क्या आशय है?

जब किसी साधन को उसकी सेवाओं के प्रतिफल में कोई पारितोषिक मिलता है तो साधन आय कहते हैं  यह एक प्रकार की अर्जित आय हैं।

घरेलू आय में क्या शामिल नहीं होता?

Q.21 बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद का क्या अर्थ है?

(Gross domestic product at market price - GDPmp)

एक देश की घरेलू सीमा में उत्पादित समस्त अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के बाजार मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं।

Q.22 बाजार मूल्य पर शुद्ध घरेलू उत्पाद का क्या अर्थ है? या शुद्ध घरेलू उत्पाद का क्या अर्थ है?

बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद में से यदि हम मूल्य

ह्रास घटा दे तो हमें बाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद प्राप्त हो जाएगा।

NDPmp = GDPmp - मूल्य ह्रास

Q.23 बाजार मूल्य पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद का क्या अर्थ है?

बाजार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद से तात्पर्य एक अर्थव्यवस्था में एक लेखा वर्ष में उत्पादित समस्त अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य के योग से है।  जिसमें विदेशों से शुद्ध अर्जित आय भी सम्मिलित रहती है।

GNPmp = GDPmp +  विदेशों से शुद्ध आय

Q.24 बाजार मूल्य पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद का क्या अर्थ है?

बाजार कीमत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद ज्ञात करने के लिए

बाजार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद GNPmp में से मूल्यह्रास घटाया जाता है ।

NNPmp = GNPmp -  मूल्यह्रास

Q.25 साधन लागत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद या सकल राष्ट्रीय आय का क्या अर्थ है?

साधन लागत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद याद करने के लिए किसी देश के सामान्य निवासियों द्वारा 1 वर्ष में साधन लागत पर की गई सकल मूल्य वृद्धि तथा विदेशों से शुद्ध साधनाए को जोड़ा जाता है ।

GNPfc = GDPfc + विदेशी शुद्ध साधन आय

Q.26 साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद का क्या अर्थ है? या राष्ट्रीय आय

राष्ट्रीय आय एक देश के सामान्य निवासियों द्वारा देश की घरेलू सीमा तथा शेष विश्व से 1 वर्ष में मजदूरी , लगान ,ब्याज तथा लाभ के रूप में अर्जित साधन आय हैं । यह घरेलू साधन आय और विदेशों से अर्जित

शुद्ध साधन आय का योग है।

NNPfc or NI = NDPfc +  विदेशी शुद्ध साधन आय

Q.27 साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद या शुद्ध घरेलू आय ज्ञात कीजिए।

साधन लागत से आशय उत्पादन के साधनों को प्राप्त होने वाली

आय से है यह आए किसी देश की घरेलू सीमा में सभी उत्पादकों द्वारा एक लेखा वर्ष में मजदूरी लगान ब्याज तथा लाभ के रूप में अर्जित साधन आय का जोड़ है।

NDPfc = NDPmp - अप्रत्यक्ष कर  + आर्थिक सहायता

Q.28 साधन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद या सकल घरेलू आय कैसे ज्ञात की जाती हैं।

साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद में यदि हम मूल्य ह्रास को जोड़ दे तो हमें साधन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद ज्ञात हो जाएगा।

GDPfc = NDPfc + मूल्य ह्रास

Q.29 राष्ट्रीय प्रयोज्य आय क्या है ?

राष्ट्रीय प्रयोज्य आय = राष्ट्रीय आय ( साधन लागत पर शुद्ध घरेलू आय + विदेशों से शुद्ध साधन आय ) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर + शेष विश्व से शुद्ध चालू हस्तांतरण

Q.30 नाममात्र की सकल घरेलू उत्पाद का क्या अर्थ है ?

नाममात्र के सकल घरेलू उत्पाद से तात्पर्य चालू मूल्यों पर सकल घरेलू उत्पाद से लिया जाता है।

Q.31 वास्तविक  सकल घरेलू उत्पाद का क्या आशय है?

वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद को स्थिर मूल्यों पर सकल घरेलू उत्पाद भी कहते हैं।

Q.32 मूल्य वृद्धि रीति से राष्ट्रीय आय की गणना का क्या आशय है?

उत्पाद अथवा मूल्यवृद्धि विधि –

यह वह विधि है जो एक लेखा वर्ष में देश की घरेलू सीमा के अंदर प्रत्येक उत्पादक उद्यम द्वारा उत्पादन में किए गए योगदान की गणना करके राष्ट्रीय आय को मापती है।

उत्पाद मूल्य एक लेखा वर्ष के दौरान किसी फर्म द्वारा उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं का बाजार मूल्य होता है।

Q.33 राष्ट्रीय आय की गणना की आय रीति क्या है ?

आय विधि -

इस विधि के अंतर्गत उत्पादन के विभिन्न साधनों द्वारा उनकी सेवा के प्रतिफल के रूप में अर्जित किए जाने वाले भुगतान या साधनों की आय का योग किया जाता है। इस योग में विदेशों से अर्जित शुद्ध आय को भी जोड़ दिया

जाता है

Q.34 व्यय रीति से राष्ट्रीय आय की गणना से आप क्या समझते हैं ?

व्यय विधि

व्यय विधि वह विधि है जिसके द्वारा एक लेखा वर्ष में बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद पर किए गए अंतिम व्यय को मापा जाता है। यह अंतिम व्यय बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद के बराबर होता है।

Q.35 सकल घरेलू उत्पाद GDP तथा सकल राष्ट्रीय उत्पाद NDP में अंतर कीजिए।

सकल घरेलू उत्पाद GDP

 

सकल राष्ट्रीय उत्पाद NDP

1.सकल घरेलू उत्पाद GDP देश के घरेलू क्षेत्र में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को बताता है।

 

सकल राष्ट्रीय उत्पाद GNP देश में सामान्य निवासियों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं का बाजारी मूल्य होता है।

 

2. सकल घरेलू उत्पाद GDP एक क्षेत्रीय घरेलू धारणा है जो देश के घरेलू क्षेत्र  तक सीमित होती है।

 

सकल राष्ट्रीय उत्पाद GNP  एक राष्ट्रीय धारणा है जिसका संबंध देश के सामान्य निवासियों के साथ होता है।

 

3. सकल घरेलू उत्पाद GDP = शुद्ध घरेलू उत्पाद GNP  - शुद्ध विदेशी साधनाए अर्थात इस धरना में शुद्ध विदेशी साधन आय शामिल नहीं होती।

 

सकल राष्ट्रीय उत्पाद GNP =  सकल घरेलू उत्पाद GDP +शुद्ध विदेशी साधना आय अर्थात इस धारणा में शुद्ध विदेशी साधन आय शामिल होती है।

 

4. सकल घरेलू उत्पाद GDP  एक संकुचित धारणा है जो केवल घरेलू क्षेत्र तक सीमित होती है।

 

सकल राष्ट्रीय उत्पाद  GNP एक विस्तृत धरना है क्योंकि इसमें विदेशी साधनाए सम्मिलित होती है।

 

Q.36 हरित GNP क्या है? Green GNP

हरीत GNP स्थाई आर्थिक वृद्धि( sustainable economic growth) को सूचित करता है।  स्थिर आधार वर्ष का जीएनपी GNP उत्पादन के दौरान देश में होने वाले पर्यावरणीय प्रदूषण एवं प्राकृतिक संसाधनों के नष्ट होने की प्रक्रिया को अपनी गणना में सम्मिलित नहीं करता।

बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण एवं प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक विदोहन के साथ जीएनपी में होने वाली वृद्धि को स्थाई आर्थिक विकास की श्रेणी में नहीं माना जा सकता । अतः हरित जीएनपी उस जीएनपी को सूचित करता है जो देश में प्राकृतिक संसाधनों के उचित स्थाई प्रयोग एवं पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण करने में सहायता देता है ।

कुछ विशिष्ट प्राचलों ( parameters) जिसे प्राकृतिक साधनों के अत्यधिक प्रयोग एवं पर्यावरण प्रदूषण के साथ किया गया जीएनपी आकलन हरित जीएनपी कहलाता है।

Q.37 राष्ट्रीय आय का महत्व लिखिए।

राष्ट्रीय आय का महत्व निम्नलिखित है-

1. तुलनात्मक अध्ययन में सुविधा - विभिन्न देशों के राष्ट्रीय आय के आंकड़े उनकी प्रगति का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है।

2. करारोपण में सहायक - राष्ट्रीय आय के आधार पर करके नीति का निर्धारण किया जाता है । राष्ट्रीय आय के द्वारा लोगों की कर देय क्षमता का पता लगाया जा सकता है तथा कर की राशि को घटाया जा सकता है।

3. नियोजन में सहायक - राष्ट्रीय आय के आंकड़ों के

आधार पर ही उत्पादन और उपभोग बचत तथा

विनियोग संबंधी आर्थिक योजनाएं बनाई जा सकती है।

4. व्यवसायिक संतुलन - राष्ट्रीय द्वारा विभिन्न व्यवसायों का विकास संतुलन तथा उन पर निर्भरता का पता लगाया जा सकता है।

5. राष्ट्रीय कल्याण का मापदंड - राष्ट्रीय आय राष्ट्रीय कल्याण के मापदंड के रूप में भी काम करती है।

6. नीति निर्धारण में सहायक - राष्ट्रीय आय से संबंधित आंकड़े उद्योग नीति , आयात निर्यात नीति, प्रशुल्क नीति , मजदूरी नीति आदि के निर्माण में सहायक है।

7. जीवन स्तर का ज्ञान - देश की राष्ट्रीय आय आधार पर लोगों के जीवन स्तर की जानकारी प्राप्त की जा सकती हैं।

 

राष्ट्रीय आय तथा प्रति व्यक्ति आय में अंतर समझाइए।

राष्ट्रीय आय तथा राष्ट्रीय संपदा में क्या अंतर है समझाइए।

नाम मात्र की सकल घरेलू उत्पाद तथा वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद में क्या अंतर है समझाइए।

सकल घरेलू उत्पाद तथा कल्याण पर एक नोट लिखिए।

राष्ट्रीय आय का महत्व समझाइए।

भारत के सामान्य निवासी होने का क्या आशय है पूर्णतः समझाइए।

संख्यात्मक प्रश्न

 

 

 

 

UNIT – 3 मुद्रा और बैंकिंग

Q.1 मुद्रा के कार्य क्या है?

मुद्रा वह है जो मुद्रा का कार्य करें इस कथन को स्पष्ट कीजिए। 

मुद्रा के कार्य को चार भागों में विभाजित किया जाता है।

A. प्राथमिक एवं प्रधान कार्य

B. सहायक या गौण कार्य

C. अकस्मिक कार्य

D. अन्य कार्य

A. प्राथमिक एवं प्रधान कार्य -

1. विनिमय का माध्यम - मुद्रा ने वस्तु विनिमय के दोहोरी संयोग की अभाव की कठनाई को दूर करके विनिमय कि माध्यम से उसे व्यवस्थित एवं सरल बना दिया है।

2. मूल्य का मापक - मुद्रा मूल्य के मापक रूप में वस्तुओं एवं सेवाओं की विनिमय शक्ति को मापने का कार्य करता है।

B. सहायक या गौण कार्य -

1. मूल्य संचय का आधार - वस्तु का संचय संग्रहण की समस्या एवं सेवाओं के संचय का अभाव की समस्या को मुद्रा धन संचय के रूप में मूल्य संचय का आधार बनाया है।

2. भावी भुगतान का आधार - भुगतानों को भविष्य में

टालने एवं वर्तमान मूल्यों पर सौदे तथा साख का आधार मुद्रा के भावी भुगतान के गुण से ही संभव है।

3. मूल्य का हस्तांतरण - मुद्रा द्वारा मूल्य का हस्तांतरण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति और एक स्थान से दूसरे स्थान पर सफलतापूर्वक किया जाता हैं।

C. अकस्मिक कार्य

1. राष्ट्रीय आय का वितरण -

2. साख का आधार

3. पूंजी की गतिशीलता

4. अधिकतम संतुष्टि का साधन

D. अन्य कार्य

1. निर्णय का वाहक

2. भुगतान स्थिति की सूचक

Q.2 केंद्रीय बैंक के वर्जित कार्य क्या है?

अथवा

रिजर्व बैंक के वर्जित या निषिद्ध कार्य लिखिए।

रिजर्व बैंक of india के वर्जित कार्य निम्नलिखित हैं -

1. रिजर्व बैंक अपने कार्यालय को छोड़कर किसी प्रकार की

अचल संपत्ति नहीं खरीद सकता और न हीं इन संपत्ति पर ऋण ले सकता है।

2. रिजर्व बैंक किसी भी दशा में किसी जमानत के किसी को भी देना नहीं दे सकता।

3. रिजर्व बैंक किसी कंपनी के अंश एवं शेयर नहीं खरीद सकता।

4. रिजर्व बैंक किसी भी प्रकार का व्यापारिक कार्य नहीं कर सकता है।

5. रिजर्व बैंक अपने निक्षेपों पर इसी प्रकार आया आज नहीं दे सकता है।

Q.3 एक अच्छी मुद्रा के गुण लिखिए।

Or

एक अच्छे मुद्रा पदार्थ के गुण लिखिए।

एक अच्छी मुद्रा में निम्न लिखितत गुणों का समावेश होना

चाहिए।

1. टिकाऊपन - एक मुद्रा टिकाऊ होने चाहिए अर्थात एक बार जिस मुद्रा का निर्गमन किया जाए उसका वर्षों तक प्रयोग किया जाना चाहिए।

2. मितव्ययिता - अच्छी मुद्रा वहां है जिसमें

मितव्ययिता का गुण पाया जाता है, अर्थात मुद्रा व्यवस्था कम खर्च ली होनी चाहिए।

3. वहनीयता - एक अच्छी मुद्रा पदार्थ के लिए अवश्य है कि उसमें वहनीयता का गुण होना चाहिए , अर्थात मुद्रा को एक स्थान से दूसरे स्थान मिले जाना आसान हो।

4. सामान्य स्वीकृति - मुद्रा में सामान्य स्वीकृति का गुण होना चाहिए अर्थात जनमानस द्वारा मुद्रा को आसानी से स्वीकार किया जाना चाहिए।

5. मूल्य स्थायित्व - अच्छी मुद्रा में मूल्यों में ज्यादा उतार

चढ़ाव नहीं होना चाहिए।

Q.4 बैंक दर क्या है?

 बैंक दर वह दर है जिस पर देश का केंद्र बैंक का

अन्य व्यापारी बैंकों द्वारा प्रस्तुत प्रथम श्रेणी के व्यापारी बिलों की पुनर्कटौती करता है तथा स्वीकृत प्रतिभूतिओं के आधार पर ऋण देने के लिए तैयार रहता है।

Q.5 मुद्रा का अर्थ एवं मुद्रा की परिभाषा लिखिए।

मुद्रा कोई भी ऐसी वस्तु है जिसे विनिमय के माध्यम, मूल्य के

मापक, शक्ति के संचय तथा भावी भुगतान के मान के रूप में सभी व्यक्तियों द्वारा स्वतंत्र ,विस्तृत एवं सामान्य रुप से स्वीकार किया जाता है।

प्रो. हार्टले विदर्भ के अनुसार - " मुद्रा वह है जो मुद्रा का कार्य करें।"

Q.6 केंद्रीय बैंक की परिभाषा दीजिए।

केंद्रीय बैंक वह हे जो देश की समूची बैंकिंग व्यवस्था हो नियंत्रित करते हैं। यह वह बैंक है जो देश की मौद्रिक, बैंकिंग तथा साख प्रणाली का नियमन एवं नियंत्रण करता है भारत का केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया है जिसकी स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई।

Q.7 उच्च शक्ति मुद्रा किसे कहते हैं?

what is high powered Money

उच्च शक्ति मुद्रा या हाई पावर्ड मनी - यह मुद्रा की पूर्ति के निर्धारण से जुड़ा हुआ है। यह देश की मौद्रिक सत्ता के कुल देयताओं को स्पष्ट करती है।

इसमें जनता के पास जमा नोट एवं सिक्के की मात्रा तथा सरकार

एवं व्यापारिक बैंकों के पास जमाए शामिल की जाती

है।

सूत्र -

H = C + R

H = उच्च शक्ति शाली मुद्रा

C = जनता के पास चलन नोट एवं सिक्के        

R = सरकार एवं बैंकों की आरबीआई के पास जमा

Q.8 वस्तु विनिमय प्रणाली क्या है ? इसकी क्या कमियां है। barter system?

उत्तर - वस्तु विनिमय प्रणाली किसी भी अर्थव्यवस्था की वह प्रणाली जिसमें वस्तुओं के बदले वस्तुओं का लेनदेन किया जाता है। अर्थात अदला-बदली की जाती है ,वस्तु विनिमय प्रणाली कहलाती है।

आर.पी. केन्ट :- " वस्तु विनिमय मुद्रा का विनिमय

माध्यम के रूप में प्रयोग किए बिना वस्तुओं का वस्तुओं के

 लिए प्रत्यक्ष विनिमय है।"

वस्तु विनिमय प्रणाली की कमियां , दोष या कठिनाइयां निम्नलिखित है :-

1. क्रय शक्ति संचय का अभाव :- वस्तु विनिमय प्रणाली में क्रय शक्ति के संचय का अभाव पाया जाता है। क्रय शक्ति संचय के अभाव में पूंजी निर्माण संभव नहीं है।

2. मूल्य मापक का अभाव :- वस्तु विनिमय प्रणाली में वस्तु का मूल्य निश्चित करना सबसे बड़ी कठिनाई है । इसमें एक सर्वमान्य मूल्यमापक का अभाव होता है।

3. वस्तु विभाजन में कठिनाई :- वस्तु विनिमय प्रणाली में वस्तुओं के विभाजन की कठिनाइयां होती है, जिससे विनिमय में कठिनाई आती है।

4. भावी भुगतान की कठिनाई :- भविष्य में किए जाने वाले भुगतान में कठिनाइयां उत्पन्न होती है।

5. दोहरे सहयोग का अभाव :- वस्तु विनिमय प्रणाली में दोनों जरूरतमंद व्यक्तियों की जरूरत की वस्तुओं का संयोग मिलना जरूरी होता है।

Q.9 मुद्रा पूर्ति की परिभाषा दीजिए।

मुद्रा पूर्ति से तात्पर्य है कि किसी विशेष समय में अर्थव्यवस्था में मुद्रा की कुल मात्रा से है। इसमें नगद मुद्रा एवं मांग जमा शामिल है।

विस्तृत रूप में लोगों के जेब में लोगों के खाते में बैंकों में जमा तथा मांग जमा तथा व्यापारिक बैंकों में समाए जमा राशि को भी विस्तृत रूप में मुद्रा पूर्ति में शामिल किया जाता है।

Q.10 मुद्रा के प्राथमिक कार्य क्या है?

मुद्रा के दो प्राथमिक कार्य हैं - 1.विनिमय का माध्यम 2. मूल्य का मापक

मुद्रा के गौण कार्य बताइए।

1. मूल्य संचय का आधार -

2. भावी भुगतान का आधार -

3. मूल्य का हस्तांतरण -

मुद्रा के आकस्मिक कार्य बताइए।

 अकस्मिक कार्य

1. राष्ट्रीय आय का वितरण -

2. साख का आधार

3. पूंजी की गतिशीलता

4. अधिकतम संतुष्टि का साधन

Q.11 मुद्रा के स्थैतिक कार्य क्या है?

स्थैतिक कार्य वे कार्य हैं जो अर्थव्यवस्था का संचालन तो करते हैं किंतु उनमें गति उत्पन्न नहीं करते इनमें विनिमय का माध्यम ,मूल्य का मापक, मूल्य संचय, मूल्य का हस्तांतरण ,स्थगित भुगतान आदि है। इन्हें निष्क्रिय कार्य अथवा तकनीकी कार्य भी कहा जाता है।

Q.12 मुद्रा के गत्यात्मक कार्य क्या है? प्रावैधिकी

प्रावैगिक अथवा गत्यात्मक कार्य मुद्रा के कार्य है जिनसे

अर्थव्यवस्था में आर्थिक गतिविधियां सक्रिय रूप में प्रभावित होती है। यह आय स्तर , आय वितरण , रोजगार स्तर,  कीमत स्तर आदि को प्रभावित करते हैं।

Q.13 वास्तविक एवं हिसाबी मुद्रा में क्या अंतर है?

वास्तविक मुद्रा - वास्तविक मुद्रा से अभिप्राय उस मुद्रा से है जो देश में वास्तविक रूप से चलन में होती है जो वस्तुओं और सेवाओं के विनिमय का माध्यम होती है और सामान्य मूल्यों का मापदंड होती है।

हिसाबी मुद्रा - ऐसी मुद्रा वह है जिसमें ऋणों , कीमतो और

सामान्य क्रय शक्ति की व्याख्या की जाती है । यह जरूरी नहीं है कि यह मुद्रा वास्तविक चलन में हो।

वास्तविक मुद्रा

हिसाबी मुद्रा

1. यह मुद्रा वास्तव में चलन होती है।

 

इस मुद्रा का केवल सैद्धांतिक महत्व है।

 

2. इसके रूप और गुणों में परिवर्तन होता रहता है।

 

इस के रूप में परिवर्तन नहीं होता।

 

Q.14 क्या भारतीय रुपैया प्रामाणिक मुद्रा है?

वर्तमान में भारतीय रुपैया पूर्ण रूप से प्रमाणित मुद्रा नहीं है।

प्रमाणिक मुद्रा के रूप में यह देश की प्रधान मुद्रा एवं असीमित विधिग्राह्य तो है।  मगर यह शुद्ध धातु का नहीं बना हुआ है । और ना ही इसका अंकित मूल्य वास्तविक मूल्य के बराबर है।  इसलिए कहा जा सकता है कि भारतीय

 रुपैया पूर्ण रूप से प्रमाणित मुद्रा नहीं है।

Q.15 असीमित विधिग्राह्य मुद्रा क्या है?

यह मुद्रा है जिसे किसी भी मात्रा में ऋण एवं सेवाओं के भुगतान करने के लिए दिया अथवा लिया जा सकता है। भारत में रूपया 50 पैसे का सिक्का तथा कागजी नोट इसी प्रकार की मुद्रा है।

Q.16 सीमित विधिग्राह्य मुद्रा से क्या आशय है?

इस मुद्रा को एक निश्चित मात्रा मुद्रा से अधिक लेने के लिए

बाध्य नहीं किया जा सकता यह सांकेतिक होती है। एक पैसे से लेकर 25 पैसे तक सभी भारतीय सिक्के सीमित विधिग्राह्य  मुद्रा है।

Q.17 विधिग्राह्य मुद्रा क्या है? लीगल टेंडर मनी क्या है ?

इसे कानूनी में मुद्रा भी कहते हैं इस मुद्रा को ऋण तथा

सेवा आदि के बदले भुगतान में स्वीकार करने में कोई भी रेसिंग कार नहीं कर सकता भारत में रुपए पैसे और नोट सभी विधि कराइए मुद्रा हैं।

Q.18 ऐच्छिक मुद्रा क्या है?

यह वह मुद्रा होती है जिसे स्वीकार करने के लिए कोई भी व्यक्ति बाध्य नहीं होता। यह उनकी इच्छा पर निर्भर करता है कि वह उन्हें ऋणों, सेवाओं के भुगतान के बदले में स्वीकार करें ना करें इस श्रेणी में चेक , विनिमय विपत्र,  हुंडी आदि आते हैं।

Q.19 धातु मुद्रा क्या है ?

धातु मुद्रा वह होती है जो किसी धातु की बनी होती है । जैसे-

 सोना, चांदी ,तांबा आदि के सिक्के धातु मुद्रा दो प्रकार की होती है। प्रमाणित मुद्रा और सांकेतिक मुद्रा

Q.20 प्रामाणिक मुद्रा क्या है ?

यह देश की प्रधान मुद्रा होती है । इसी के द्वारा किसी देश की वस्तुओं तथा सेवाओं का मूल्य आंका जाता है । इसका अंकित मूल्य उसके वास्तविक मूल्य के बराबर होता है । यह सीमित विधिग्राह्य  मुद्रा होती है इसकी स्वतंत्र मुद्रा ढलाई होती है।

Q.21 सांकेतिक मुद्रा या प्रतीक मुद्रा क्या है?

इस मुद्रा का प्रयोग सामान्यतः सहायक मुद्रा के रूप में किया जाता है । यह सीमित  विधिग्राह्य मुद्रा होती है । इसका अंकित मूल्य इसके वास्तविक मूल्य (धात्विक मूल्य)  से अधिक होता है।

Q.22 कागजी या पत्र मुद्रा क्या है?

पत्र मुद्रा या कागजी मुद्रा या नोट का तात्पर्य कागज पर

छपी मुद्रा से है।  इसका निर्गमन आजकल सरकारी स्वयं

करती है अथवा उनके आदेश पर देश के केंद्रीय बैंक द्वारा किया जाता है।

Q.23 साख मुद्रा क्या है ?

साख मुद्रा व्यापारिक बैंकों द्वारा अपने मांग दायित्व तथा जमाव के आधार पर निर्गत की जाती है जो चेक द्वारा स्थानांतरण होती है।

Q.24 मुद्रा की पूर्ति की सबसे अधिक तरल माप कौन सी है?

मुद्रा पूर्ति की सबसे अधिक तरल माप M1 है। जिसमें जनता के पास चलन एवं सिक्कों की मात्रा, बैंकों के पास मांग जमाए एवं अन्य जमाए शामिल होती है।

Q.25 वस्तु विनिमय की परिभाषा दीजिए।

उत्तर - किसी भी अर्थव्यवस्था की वह प्रणाली जिसमें वस्तुओं के बदले वस्तुओं का लेनदेन किया जाता है। अर्थात अदला-बदली की जाती है ,वस्तु विनिमय प्रणाली कहलातीहै।

Q.26 मुद्रा की परिभाषा दीजिए।

प्रोफेसर रैली के अनुसार -" मुद्रा कोई भी ऐसी वस्तु हो सकती है

जिसका विनिमय के माध्यम के रूप में स्वतंत्रता पूर्वक स्थानांतरण होता है और जो सामान्य ऋणों के अंतिम भुगतान में ग्रहण की जाती है।"

हार्टल विदर्स के अनुसार -" मुद्रा वह है जो मुद्रा का कार्य करें।"

Q.27 अधिविकर्ष क्या है?

जमा राशि से अधिक राशि निकालने को अधिविकर्ष कहते हैं। यह सुविधा सिर्फ विश्वासपात्र ग्राहकों को दी जाती है।

Q.28 व्यापारिक बैंक की परिभाषा दीजिए।

व्यापारिक बैंक किसे कहते हैं?

व्यापारिक बैंक का आशय उन बैंकों से होता है जिनकी

स्थापना इंडियन कंपनी सेक्टर के अंतर्गत की गई है ।और जो साधारण बैंकिंग कार्य भी संपन्न करते हैं।

Q.29 भारतीय रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण कब हुआ?

भारतीय रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी सन 1949 को हुआ।

Q.30 भारत का केंद्रीय बैंक कौन सा है ? उसकी स्थापना कब हुई ?

भारत का केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया है इसकी स्थापना 1 अप्रैल सन 1935 को हुई।

Q.31 बैंक का क्या है ?

बैंकों की सर्वोत्तम परिभाषा वेब्सटर शब्दकोश में दी गई हैं  वेब्सटर शब्दकोश के अनुसार - " बैंक वह सब संस्था है जो मुद्रा में व्यवसाय करती है। यह एक ऐसा प्रतिष्ठान है जहां धन का जमा संरक्षण तथा निर्गमन होता है तथा ऋण एवं कटौती की सुविधाएं प्रदान की जाती है और एक स्थान से दूसरे स्थान पर रकम भेजने की व्यवस्था की जाती है।

Q.32 साख निर्माण से क्या आशय है?

साख निर्माण से तात्पर्य व्यापारिक बैंकों की उस शक्ति से है जिसके द्वारा वे प्राथमिक जमाओं के आधार पर गौण जमाओं का विस्तार करते हैं।

Q.33 सावधि जमाएं क्या होती है?

सावधि जमा खाते में प्राय एक निश्चित अवधि ( लगभग 46 दिन से 3 वर्ष या उससे अधिक हो सकती है)  के लिए रकम जमा करवाई जा सकती है रकम जमा करते समय एक जमा रसीद मिलती है जिस पर रकम जमा होने की तारीख रकम निकालने की तिथि तथा रकम और ब्याज की दर लिखी होती है यह जमा रसीद अपरिवर्तनीय होती है।

Q.34 व्युत्पन्न जमाव का आधार क्या होता है?

व्युत्पन्न में जमा प्राथमिक जमा का परिणाम होती है । क्योंकि बैंक अपने नगद कोषो के आधार पर ही साख प्रदान करता है । व्युत्पन्न जमाओं को साख जमा भी कहते हैं।

Q.35 विभिन्न प्रकार की बैंक जमा खाता ओं के नाम लिखिए।

व्यापारिक बैंक का विभिन्न प्रकार की जमाएं स्वीकार

करता है । 1.  चालू जमा 2. बचत जमा 3. सावधि जमा

 4. आवर्ती जमा

Q.36 चालू जमा खाता क्या है?

चालू खाते की जमाएं चालू जमाएं कहलाती है।  चालू खाता वह खाता है । जिसमें जमा की गई रकम जब चाहे निकाली जा सकती है । चूंकि इस खाते में आवश्यकतानुसार कई बार रुपए निकालने की सुविधाएं रहती है।

Q.37 केंद्रीय बैंक क्या होता है?

केंद्रीय बैंक सर्वोच्च मौद्रिक संस्था है जो देश की संपूर्ण मौद्रिक एवं बैंकिंग व्यवस्था को नियंत्रित करता है । केंद्रीय बैंक देश की  मौद्रिक नीति का निर्माता एवं संचालक होता है।

Q.38 बैंक दर को परिभाषित कीजिए।

बैंक दर वह है जिस पर केंद्रीय बैंक  सदस्य बैंकों के प्रथम श्रेणी के व्यापारिक बिलों की पुर्नकटौती करता है । और उन्हें ऋण देता है।

Q.39 नगद संचय अनुपात सीआरआर किसे कहते हैं? CRR नगद कोष अनुपात क्या है?

देश के प्रत्येक व्यापारिक बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का एक निश्चित प्रतिशत कानूनी रूप से केंद्रीय बैंक के पास नगद कोष के रूप में जमा करना पड़ता है । जिसे नगद कोष अनुपात सीआरआर कहते हैं।

Q.40 वैधानिक तरलता अनुपात एसएलआर क्या है? सांविधिक तरलता अनुपात SLR क्या है ?

सांविधिक तरलता अनुपात का प्रतिशत उन जमाओं से है जिनको व्यापारिक बैंकों को अपनी कुल अस्थियों ( ऐसैट्स ) के एक निश्चित अनुपात में अपने पास तरल रूप में रखना पड़ता है।

Q.41 रेपो रेट किसे कहते हैं?

रेपो रेट ब्याज की वह दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक को धनराशि व्यापारिक बैंकों को उधार देता है । राष्ट्र में लोगों का बैंकिंग प्रणाली में विश्वास कायम रखने की दृष्टि से व्यापारिक बैंक अपनी तरलता स्थिति को सुदृढ़ में व्यवस्थित करने के लिए प्रायः भारतीय रिजर्व बैंक से धनराशि उधार लेते रहते हैं।

Q.42 रिवर्स रेपो रेट क्या होती है?

रिवर्स रेपो रेट ब्याज की दर को कहते हैं । जिस पर व्यापारिक बैंक अपनी अतिरेक कोष ( सर प्लस फंड्स ) भारतीय रिजर्व बैंक के पास जमा कराते हैं । ताकि ब्याज प्राप्त हो इस प्रकार के कोसों का संबंध व्यापारिक बैंकों के वैधानिक रोकड़ संचय से नहीं होता जो कि नगद कोष के अनुपात के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक के पास जमा करना पड़ता है।

Q.43 समाशोधन गृह को परिभाषित कीजिए।

केंद्रीय बैंक का सदस्य बैंक के लिए समाशोधन ग्रह का कार्य करता है । केंद्रीय बैंक के समाशोधन गृह कार्य का अर्थ है वह विभिन्न बैंकों के एक दूसरे के लेनदेन न्यूनतम नगदी के साथ निपटा देती है । क्योंकि प्रत्येक बैंक के कोष तथा खाते केंद्रीय बैंक के पास होते हैं इसलिए केंद्रीय बैंक के लिए यह तर्कपूर्ण तथा सरल कदम है।

Q.44 खुले बाजार की क्रियाओं से आप क्या समझते हैं?

साख नियंत्रण में खुले बाजार की क्रियाओं से अभिप्राय केंद्रीय बैंकों द्वारा बाजार में सरकारी तथा निजी संस्थाओं की प्रतिभूतियों के क्रय-विक्रय से होता है।

Q.45 साख के राशनिंग से आप क्या समझते हैं?

साख के राशनिंग का आशय विभिन्न व्यवसाय क्रियाओं के लिए साख का कोटा निश्चित करने से है । जब अर्थव्यवस्था में साख के प्रवाह की जांच और विशेषता सट्टात्मक क्रियाओं में साख के प्रवाह की जांच करनी हो तो साख के राशनिंग को अपनाया जाता है । आरबीआई विभिन्न व्यवसाय क्रियाओं के लिए साख का कोटा निश्चित करता है।

Q.46 भारत में व्यापारिक बैंकों  का महत्व एवं लाभ बताइए।

भारत में बैंकों का महत्व समझाइए।

आधुनिक वाणिज्य युग में बैंकों की भूमिका अति महत्वपूर्ण

 है।

1. बचत का गतिशीलन - देश की बचत के गतिशीलन का संपूर्ण श्रेय बैंकों को ही जाता है । बैंक के अभाव में जनता की बचत का उपयोग देश के व्यापार , वाणिज्य तथा उद्योग में नहीं हो सकता।

2. व्यापार व उद्योग की वित्तीय व्यवस्था - व्यापार

वाणिज्य एवं उद्योग ओ की व्यवस्था में बैंक

महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

3. मूल्यवान धातुओं की बचत - बैंकों द्वारा पत्र मुद्रा एवं साख पत्रों के प्रचलन के फलस्वरुप देश की बहुमूल्य धातुओं के प्रयोग में बचत हुई है।

4. मुद्रा का हस्तांतरण - बैंकों के माध्यम से मुद्रा का हस्तांतरण सरल,  सुगम एवं सस्ता हो गया है।

5. लोचपूर्ण मुद्रा प्रणाली - बैंकों ने देश की मुद्रा प्रणाली को

लोग पूर्ण बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

6. मूल्यों में स्थिरता - साख नियंत्रण एवं साख सृजन की उपयुक्त नीति अपनाकर बैंक का मूल्य स्तर में होने वाले अनावश्यक उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण करते हैं।

7. विदेशी व्यापार में योगदान

8. बैंकिंग आदत का विकास

 9. ग्राहकों की सेवाएं

10. पूंजी निर्माण में सहायक

Q.47 केंद्रीय बैंक तथा व्यापारिक बैंक में अंतर समझाइए।

       केंद्रीय बैंक

      व्यापारिक बैंक

1. ऐसे नोट निर्गमन का एक अधिकार प्राप्त होता है।

 

यह नोट निर्गमन नहीं कर सकता।

 

2. यह नियंत्रक बैंक ( बैंकों का बैंक) है।

3. जनता के साथ इसका कोई प्रत्यक्ष व्यवहार व संबंध नहीं रहता।

 

यह नियंत्रित बैंक है।

 

 

इसका जनता के साथ प्रत्यक्ष व्यवहार व संबंध रहता है।

 

4. यह जमा पर ब्याज नहीं देता।

 

यह जमा पर ब्याज देता है।

 

5. यह सरकार तथा व्यापारिक बैंकों को ऋण प्रदान करता है।

 

यह जनता को ऋण प्रदान करता है।

 

6. इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रहित में बैंकिंग व्यवस्था का संचालन है।

 

इसका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना तथा जनता को साख सुविधाएं प्रदान करना है।

 

 

Q.48 मुद्रा वह अधूरी है जिसके चारों ओर अर्थ विज्ञान चक्कर लगाता है स्पष्ट कीजिए। मुद्रा का महत्व लिखना है।

मार्शल के अनुसार - "मुद्रा वह अधूरी है जिसके चारों ओर समस्त अर्थ विज्ञान चक्कर लगाता है।"

मुद्रा  का महत्व

उपभोग के क्षेत्र में मुद्रा का महत्व-

1. अधिकतम संतुष्टि की प्राप्ति - उपभोक्ता द्वारा सम सीमांत दृष्टिकोण नियम का पालन करके अपने व्यय अधिकतम संतुष्टि प्राप्त कर सकता है।

2. भविष्य में भुगतान संभव - उपभोक्ता को कभी-कभी वस्तुएं उधार भी लेनी पड़ती है जिसका भुगतान भविष्य में करना होता है यह मुद्रा के द्वारा आसानी से किया जा सकता है।

3. संचय करना संभव - मुद्रा द्वारा मनुष्य अपनी आय का

एक भाग वर्तमान उपभोग पर बैठकर बाकी भविष्य के लिए बचा सकता है।

4. विभिन्न वस्तुओं का क्रय -मुद्रा द्वारा मनुष्य अपनी आवश्यकता की विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं का पर्याय कर सकता है

उत्पादन क्षेत्र में

1. बड़े स्तर पर उत्पादन - मुद्रा के चलन से बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सकता है।

2. श्रम विभाजन एवं विशिष्ट करण - मुद्रा द्वारा श्रम विभाजन एवं विशिष्ट करण संभव हो पाया।

3. उत्पत्ति के साधनों का प्रयोग - मुद्रा के कारण उत्पादक उत्पादन कार्य के लिए उत्पादन साधनों का आसानी से प्रयोग कर सकता है।

विनिमय के क्षेत्र में

1. वस्तु विनिमय की कठिनाइयों को दूर करने में मुद्रा का महत्वपूर्ण योगदान है।

2. बैंक व साख संस्थाओं के विकास में मुद्रा का महत्वपूर्ण योगदान है।

3. पूंजी संचय को मुद्रा ने संभव बनाया है।

4. पूंजी की गतिशीलता मुद्रा के माध्यम से ही संभव हुई है।

वितरण के क्षेत्र में भी मुद्रा का काफी महत्वपूर्ण योगदान है साथ ही राजस्व के क्षेत्र में भी मुद्रा काफी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

Q.49 मुद्रा एक अच्छा सेवक है किंतु बुरा स्वामी है। स्पष्ट कीजिए। या

 मुद्रा के दोष , कमियां या सीमाएं लिखिए

आर्थिक दोष

1. ऋणतंत्र को प्रोत्साहन - मुद्रा द्वारा उधार लेने की आदत

 को प्रोत्साहन मिलता है क्योंकि इसके माध्यम से उधार लेना वह देना आसान हो जाता है जिससे फिजूलखर्ची बढ़ती है।

2. अति पूंजीयन एवं अतिउत्पादन को प्रोत्साहन –

उद्योगपति ऋण आसानी से लेकर अति पंजीयन और

उत्पादन को बढ़ावा देते हैं।

3. मुद्रा के मूल्य में अस्थिरता - मुद्रा की विनिमय शक्ति में परिवर्तन होते रहते हैं और और इस परिवर्तन के विभिन्न वर्गों पर भिन्न प्रभाव पड़ते हैं परंतु कुल मिलाकर यह परिवर्तन समाज के आर्थिक जीवन में एक बड़ी अनिश्चितता पैदा कर देते हैं।

4. संपत्ति के वितरण में असमानता - मुद्रा के कारण पूंजीवाद को प्रोत्साहन मिलता है और संपत्ति के वितरण में असमानता आती है।

5. वर्ग संघर्ष का उदय - मुद्रा की शक्ति के बल पर सामान में कुछ व्यक्ति अधिक धनी होते चले जाते हैं जिससे वर्ग संघर्ष की स्थिति बनती है।

नैतिक दोष

नैतिक दृष्टिकोण से भी मुद्रा सभी दोषों की जड़ है इसने मनुष्य को लालची बना दिया है यही मनुष्य को धोखेबाजी, चोरी, डकैती हत्या, गबन, विश्वासघात ,घूसखोरी, बेमानी तथा पाप के मार्ग की ओर ले जाती है।

सामाजिक दोष

मुद्रा के कारण भौतिकवाद प्रलोभन शोषण की प्रवृत्ति जैसे सामाजिक दोषों में भी वृद्धि होती है।

Q.50 प्रमाणिक मुद्रा एवं सांकेतिक मुद्रा में अंतर लिखिए।

प्रमाणिक मुद्रा

सांकेतिक मुद्रा

1. यह देश का प्रधान सिक्का होता है।

 

यह प्रमाणित द्रव्य का

सहायक स्वरूप है।

 

2. यह असीमित  विधिग्राह्य  होती है।

 

यह सीमित विधिग्राह्य होती हैं।

 

3. इसका अंकित मूल्य वास्तविक मूल्य के बराबर होता है।

 

इसका अंकित मूल्य वास्तविक मूल्य से अधिक होता है।

 

4. इसकी स्वतंत्र मुद्रा ढलाई होती है।

 

इसकी सीमित मुद्रा ढलाई होती है।

 

5. यह शुद्ध धातु का बना होता है।

 

इसमें खोट मिला होता है।

 

Q.51 मुद्रा पूर्ति से आप क्या समझते हैं ? भारत में मुद्रा पूर्ति के अंगों को संक्षेप में समझाइए।

मुद्रा की पूर्ति एक स्टॉक का अवधारणा है किसी समय बिंदु पर जनता के पास उपलब्ध मुद्रा का स्टॉक की मुद्रा की पूर्ति कहलाता है।

भारत में मुद्रा पूर्ति के अंग या माप

मुद्रा पूर्ति के माप

M1 , M2, M3 तथा M4 भारत में मुद्रा पूर्ति के चार मापक हैं।

M1= जनता के पास करंसी + मांग जमाएं + रिजर्व बैंक के पास अन्य जमाएं ।

M2= M1 + डाकखानों के बाद बैंकों की जमाए।

M3 = M1 + बैंकों  की सावधि जमाएं।

M4 = M3 + डाकखानों की कुल जमाएं

M4  मुद्रा पूर्ति का मापक बहुत विस्तृत किंतु सबसे कम तरल है।

M1  मुद्रा पूर्ति का मापक बहुत तरल किंतु बहुत कम विस्तृत है।

Q.52 मुद्रा के ऐतिहासिक विकास क्रम को समझाइए।

मुद्रा का उद्भव कैसे और कब हुआ इसे खोज पाना असंभव और दुष्कर कार्य मात्र इतना अवश्य कहा जा सकता है कि मानव सभ्यता के मूलभूत तत्वों की तरह मुद्रा भी एक अत्यधिक प्राचीन तत्व है। मानव सभ्यता के क्रमिक विकास के साथ-साथ मुद्रा का भी क्रमिक विकास होता चला आ रहा है।

 मुद्रा का प्रयोग उस काल से भी होता था जिसके लिखित प्रमाण आज उपलब्ध नहीं है किंतु एक बात अधिकृत रूप से कही जा सकती है कि पृथक पृथक सभ्यताओं के काल में मुद्रा का विकास भी पृथक पृथक रूप में हुआ है। यदि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से हम विचार करें तो यह कह सकते हैं कि मानव के आर्थिक जीवन के विकास के साथ-साथ ही

मुद्रा का भी क्रमिक विकास हुआ है ।

इतिहास में उपलब्ध प्रमाण बताते हैं कि प्राचीन काल में दक्षिण महासागर के क्षेत्र में स्थित टापू पर पत्थर की मुद्राओं का चलन था । ऋग्वेद काल में मुद्रा के रूप में गाय का प्रयोग किया जाता था । कुछ इतिहासकारों का मानना है कि सिक्कों का सर्वप्रथम प्रयोग लीडिया (  Lydia ) में ईसा से 6000-700 वर्ष पूर्व हुआ था ऐतिहासिक दृष्टिकोण से मुद्रा के विकास क्रम को निम्नानुसार रखा जा सकता है ।

1.  वस्तु मुद्रा 2. धातु मुद्रा  3. पत्र मुद्रा    4.साख मुद्रा।

 

मांग जमाए क्या होती है?

एटीएम का पूर्ण रूप क्या है?

साख गुणांक का सूत्र बताइए।

विश्वसनीय मुद्रा क्या है?

क्रेडिट कार्ड क्या है?

सीआरआर तथा साख गुणक के बीच किस प्रकार का संबंध होता है?

अगर सीआरआर 5% है तो शाख गुणांक का मूल्य क्या होगा

बैंक दर एवं ब्याज दर में क्या अंतर है?

भारत में स्वर्ण विनिमय मान कब स्थापित हुआ ?

बैंक साख का सृजन कैसे करते हैं?

केंद्रीय बैंक के कार्य कौन-कौन से हैं?

सरकार के बैंकर के रूप में केंद्रीय बैंक को समझाइए।

अनुसूचित एवं गैर अनुसूचित बैंकों में अंतर बताइए।

भारत में केंद्रीय बैंक द्वारा साथ नियंत्रण के लिए अपनाया जाने वाले मात्रात्मक एवं गुणात्मक उपायों को समझाइए।

या

भारतीय रिजर्व बैंक साख का नियंत्रण कैसे करता है ?समझाएंगे।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साख नियंत्रण उपायों को संक्षेप में समझाइए।

व्यापारिक बैंकों के कार्य लिखिए।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

UNIT – 4 आय एवं रोजगार का सिद्धांत

Q.1 सीमांत बचत प्रवृति क्या है?

सीमांत बचत प्रवृति बचत में परिवर्तन तथा आय में परिवर्तन का अनुपात है।

आय में होने वाले परिवर्तन के कारण बचत में होने वाले परिवर्तन के अनुपात को सीमांत अब प्रवृति कहते हैं।

MPS= ∆S/∆Y

Q.2 अनैच्छिक बेरोजगारी किसे कहते हैं?

अनैच्छिक बेरोजगारी वह स्थिति है जिसमें लोग काम करने के योग्य होते हैं, और प्रचलित मजदूरी दर पर काम करने के लिए तैयार होते हैं, किंतु उन्हें काम नहीं मिलता।

यहां स्थिति अर्थव्यवस्था में श्रमिकों की अतिरेक पूर्ति को दर्शाती है।

Q.3 पूर्ण रोजगार से क्या आशय है?

पूर्ण रोजगार एक ऐसी स्थिति है जिसमें उन सब लोगों को जो काम करने के योग्य तथा प्रचलित मजदूरी की दर पर काम करने के इच्छुक हो उन्हें काम मिल जाता है।

साधनों का पूर्ण रोजगार वह स्थिति जहां पर समस्त उत्पादन अधिकतम होता है इस स्थिति में यदि वस्तु एवं सेवा के मांग में वृद्धि होती है तो भी उत्पादन नहीं बढ़ता और उत्पादन ना बनने से मांग अधिक्य हो जाता है जिससे मुल्यों में वृद्धि हो जाती है।

Q.4 सीमांत उपभोग प्रवृत्ति को समझाएं

सीमांत उपभोग प्रवृत्ति उपभोग में परिवर्तन तथा आय में परिवर्तन का अनुपात है।

आय में परिवर्तन का वह भाग दिया समानुपात जिसका उपभोग किया जाता है । सीमांत उपभोग प्रवृत्ति कहलाता है।

MPC=∆C/∆Y

Q.5 बचत फलन का अर्थ एवं परिभाषा लिखिए ।

बचत फलन यह बचत तथा आय के संबंध को दर्शाता है बचत फलन विभिन्न आय स्तर पर बचत की इच्छा को प्रदर्शित करता है।

बचत तथा आय से फलनात्मक संबंध को बचत कहते हैं।

 किंस के अनुसार बचत आय का फलन हैं। S=f(y)

Q.6 प्रभावी मांग से क्या आशय है ? (प्रभावपूर्ण मांग )

प्रभावपूर्ण मांग क्या है?

किंस रोजगार सिद्धांत के अनुसार पूंजीवाद अर्थव्यवस्था में अल्पकाल में कुल उत्पादन अथवा राष्ट्रीय आय रोजगार के स्तर पर निर्भर करता हैं क्योंकि अल्पकाल में उत्पादन के अन्य साधन जैसे - पूंजी , तकनीक आदि रहते हैं। रोजगार का स्तर प्रभाव पूर्ण मांग को निर्भर करता है । प्रभावपूर्ण मांग सामूहिक  मांग के उस स्तर को कहते हैं जिस पर

सामूहिक पूर्ति के बराबर होती हैं।

Q.7 तरलता पसंदगी क्या है?   या

तरलता जाल क्या है ?

प्रोफ़ेसर किंग्स ने के अनुसार ब्याज की दर तरलता पसंदगी भी पर निर्भर करती है। तरलता पसंदगी का आशय नकदी के रूप में साधनों के रखने से जिसके तीन उद्देश्य है -

1. आकस्मिक कार्य उद्देश्य

2.दूरदर्शिता उद्देश्य

3. सट्टा उद्देश्य

Q.8 सीमांत उपभोग प्रवृत्ति क्या है? या

MPC क्या है?

उपभोग स्तर में परिवर्तन का कुल आय में परिवर्तन से अनुपात सीमांत उपभोग प्रवृत्ति कहलाता है।

कुरीहारा के अनुसार - " सीमांत उपभोग प्रवृत्ति उपभोग में होने वाले परिवर्तन तथा आय में होने वाले परिवर्तन का अनुपात है।"

किजर के अनुसार - " कुल उपभोग स्तर में परिवर्तन का कुल आय में परिवर्तन से अनुपात सीमांत उपभोग प्रवृत्ति कहलाता है।"

सूत्र अनुसार

सीमांत उपभोग प्रवृत्ति MPC = उपभोग में परिवर्तन C / आय में परिवर्तन Y

MPC = ∆C / ∆Y

Q. 9 मितव्ययिता के विरोधाभास की व्याख्या कीजिए ।

उत्तर - प्रतिष्ठित विचारधारा के अर्थशास्त्री मित्तव्ययिता और बचत की क्रिया को वरदान मानते थे। उनका मानना था की जो कुछ बचत होता है , वह स्वत: ही विनियोजित हो जात है । व्यक्तिगत बचत में सभी लोगों के द्वारा की गई वृद्धि राष्ट्रीय आय में वृद्धि करती है।

जबकि किंस ने मितव्ययिता को निजी वरदान और एक सामाजिक अभिशाप माना है । क्योंकि मित्तव्ययिता व्यक्तिगत तौर पर तो अच्छी होती है मगर एक संपूर्ण राष्ट्र के लिए हानिकारक है। अधिक बचतें आय के स्तर में कमी लाएगी।

Q.10 समग्र मांग का अर्थ समझाइए।

कुल मांग या समग्र मांग का आशय संपूर्ण अर्थव्यवस्था में वस्तु तथा सेवाओं पर होने वाले कुल व्यय से होता है । इस प्रकार कुल मांग को कुल व्यय भी का सकते हैं।  कुल मांग में उपभोग , विनिमय, शुद्ध निर्यात  पर से जाने वाले व्यय का योग शामिल हैं।

Q.11 समग्र मांग के घटक क्या है?

1. घरेलू उपभोग मांग 2. विनियोग मांग 3. वस्तु एवं सेवाओं के लिए सरकारी मांग 4. शुद्ध निर्यात मांग

Q.12 समग्र पूर्ति का अर्थ लिखिए। या कुल पूर्ति

कुल पूर्ति का आशय संपूर्ण अर्थव्यवस्था में उत्पन्न माल तथा सेवा के योग से जो व्यकतियों या फर्मों द्वारा अथवा सरकार द्वारा उत्पन्न किया गया है । संक्षेप में शुद्ध राष्ट्र उत्पाद NNP को कुल पूर्ति कहा जाता है।

Q.13 उपभोग क्रिया क्या है?

आय एवं उपभोग के बीच संबंध को उपभोग प्रवृत्ति या उपभोग क्रिया कहां जाता है।  आय में वृद्धि होने से उपभोग में भी वृद्धि हो जाती है।  उपभोग में वृद्धि आय कितना में कम होती है।

Q.14 औसत उपभोग प्रवृत्ति का क्या आशय है?

यदि कुल उपभोग व्यय में  कुल आय का भाग दे दे तो

औसत उपभोग प्रवृत्ति प्राप्त होगी ।

बीजगणितीय सूत्र

ओसत उपभोग प्रवृत्ति ( APC ) = C/Y

APC ओसत उपभोग प्रवृत्ति।      C= कुल उपभोग।      Y= कुल आय

Q.15 बचत प्रवृर्ती क्या है?

उपभोग व्यय पर आय का अधिक्य बचत कहलाता है। बचत प्रवति या बचत क्रिया का प्रत्यक्ष संबंध आय से हे जब आय बढ़ती है , तो बचत मैं भी वृद्धि होगी और जब आय घटती जाती है तो बजत में कमी आ जाएगी । बचत तथा उपभोग में विपरीत संबंध पाया जाता है।

S=Y-C

Q.16 औसत बचत प्रवृत्ति क्या है?

औसत बचत प्रवृति बचत तथा आय का अनुपात है। अर्थात

कुल बचत में से कुल आय को घटाने परोस वक्त बचत प्राप्त हो जाती है।

APS=S/Y

Q.17 सीमांत बचत प्रवृर्ती क्या है?

सीमांत ब प्रवृत्ति बचत में परिवर्तन तथा आय में परिवर्तन अनुपात है। सीमांत अब प्रवृत्ति आय में परिवर्तन की तुलना में  बचत मैं हुए परिवर्तन को नापता है।

MPS = ∆S / ∆Y =        बचत में वृद्धि / आय मैं वृद्धि

MPC + MPS =1

MPC = 1- MPS

MPS = 1- MPC

Q.18 निवेश या विनियोग से क्या तात्पर्य है? या सकल निवेश से क्या तात्पर्य है?

निवेश या विनियोग से अभिप्राय उस खर्चे से हैं जिसके

द्वारा पूंजीगत  पदार्थों जैसे मशीन,  औजार , निर्माण हेतु कच्चा माल आदि के भंडारों में वृद्धि की जाती है।

स्वायत्त निवेश या स्वतंत्र विनियोग का क्या अर्थ है?

यह निवेश या विनियोग आय / रोजगार के स्तर से स्वतंत्रता होता है । ऐसा निवेश सरकार द्वारा सामाजिक कल्याण के भावना से किया जाता है।

प्रेरित निवेश या प्रेरक विनियोग का क्या अर्थ है?

प्रेरित निवेश अर्थव्यवस्था में आय एवं लाभ की मात्रा पन निर्भर करता है। लाभ की आशा से प्रेरित होकर किया गया निवेश प्रेरित निवेश कहलाता है।  यह पूंजी निवेश की सीमांत कुशलता तथा ब्याज की दर पर निर्भर करता है।

Q.19 न्यून रोजगार संतुलन क्या है?

न्यून मांग क्या होती है?

न्यून मांग तब होती है । जब कुल मांग पूर्ण रोजगार स्तर

पर कुल पूर्ति से कम होती है।

न्यून मांगू  = AD < AS (पूर्ण रोजगार स्तर पर)

Q.20 विनियोग गुणक क्या है? या निवेश गुणक

निवेश गुणक आय में  संबंध स्थापित करता है । निवेश गुणक , निवेश में परिवर्तन तथा आय में परिवर्तन का अनुपात है।

K= ∆Y/∆I

K= गुणक,          Y= आय में परिवर्तन        I= निवेश में परिवर्तन

Q.21 पूंजी की सीमांत कुशलता से आप क्या समझते हैं? पूंजी की सीमांत क्षमता

अतिरिक्त निवेश से प्राप्त होने वाले लाभ की संभावना को पूंजी की सीमांत कुशलता कहते हैं।

 MEC = प्रत्याशी आय / लागत

अनुमानित आय तथा पूर्ति कीमत के मूल्य को ज्ञात करने के बाद पूंजी की सीमांत क्षमता का अनुमान उस  बट्टा दर के रूप में लगाया जा सकता है  जो इन दोनों धारणाओं के मूल्यों को बराबर करती।

Q.22 उपभोग तथा आय में क्या संबंध है?

उपभोग तथा आय में धनात्मक संबंध पाया जाता है । आय बढ़ने पर उपभोग भी बढ़ता है मगर आय की तुलना में उपभोग  धीमी गति से बढ़ता है।

Q.23 नियोजित या प्रायोजित बचत का अर्थ समझाइए।

बचत कर्ताओं द्वारा किसी योजना के उद्देश से बचत किये जाना , नियोजित या प्रायोजित बचत कहलाती है

नियोजित या प्रायोजित विनियोग का अर्थ बताइए।

निवेश कर्ताओं द्वारा किसी योजना के उद्देश्य से निवेश या विनियोग की जाना नियोजित या प्रायोजित निवेश कहलाता है । नियोजित बचत तथा नियोजित निवेश एक दूसरे के बराबर भी हो सकते हैं और नहीं भी हो सकते हैं।

Q.24 राजकोषीय नीति का क्या अर्थ है?

सार्वजनिक व्यय , कराधान और सार्वजनिक ऋण से संबंधित सरकारी उपायों को ही राजकोषीय उपाय कहा जाता है।  और इससे संबंधित नीति को राजकोषीय नीति अथवा बजट नीति करते हैं।

Q. बंद अर्थव्यवस्था क्या है?

Q. अपूर्ण रोजगार संतुलन क्या है?

Q. यदि सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) 0.8 है तो गुणक की मांग की गणना कीजिए।

Q. यदि सीमांत बचत प्रवृत्ति MPS (0.25) है तो गुणक की मांग की गणना कीजिए।

Q. स्फीति अंतराल क्या है?

Q. अवस्फिक अंतराल से क्या अभिप्राय है? या न्यून मांग

Q. अतिरेक मांग क्या होती है?

Q. किंस के रोजगार सिद्धांत की विवेचना कीजिए।

Q. पूंजी की सीमांत कुशलता को निर्धारित करने वाले तत्व को लिखिए।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

UNIT – 5 सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था

Q.1 बजट से आप क्या समझते हैं।

बजट एक वित्तीय वर्ष (भारत में 1 अप्रैल से 31 मार्च तक) में सरकार की अनुमानित आय तथा व्यय का विवरण होता है।

बजट एक विस्तृत आर्थिक विवरण है जिसमें सरकार की एक वित्तीय वर्ष की आय और व्यय का ब्यौरा होता है।

Q.2 सरकारी बजट की परिभाषा दीजिए। या

बजट की परिभाषा दीजिए।

रेने स्टोर्न के अनुसार -" बजट एक ऐसा प्रपत्र हैं जिसने सार्वजनिक आय व सार्वजनिक व्यय की एक स्वीकृति योजना होती है।"

Q.3 संतुलित बजट की परिभाषा दीजिए।

संतुलित बजट वह बजट है जिसमें सरकार की आय तथा व्यय दोनों बराबर होते हैं।

 संतुलित बजट =बराबर सरकार की आय = सरकार का व्यय

 संतुलित बजट का आर्थिक क्रियाओं के स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसके कारण न तो संकुचन कारी शक्तियां और न हीं विस्तारवादी शक्तियां काम कर पाती हैं।

Q.4 घाटे की बजट से क्या आशय है?

 घाटे का बजट - वह बजट है जिसमें सरकार की अनुमानित आय सरकार के अनुमानित व्यय से कम होती है। 

घाटे का बजट= सरकार की अनुमानित आय < सरकार का अनुमानित व्यय

 घटे के बजट का तात्पर्य यह है कि सरकार जितनी मात्रा में मुद्रा अर्थव्यवस्था में खपा सकती है। उसे अधिक मात्रा में मुद्रा अर्थव्यवस्था में प्रवाहित कर दी जाती है। फलत: अर्थव्यवस्था में विस्तारवादी शक्तियां बलवती हो उठती है।

Q.5 बचत के बजट की परिभाषा दें। या अधिक्य या अतिरेक का बजट

बचत  या अधिक्य या अतिरेक का बजट वह बजट है जिसमें सरकार की अनुमानित आय सरकार के अनुमानित व्यय से अधिक होता है।

बचत का बजट = सरकार की अनुमानित आय > सरकार का अनुमानित व्यय

Q.5 भारत में वित्तीय वर्ष की अवधि क्या है?

भारत में वित्तीय वर्ष की अवधि 1 अप्रैल से 31 मार्च तक

होती है । जिसमें भारत के बजट का आय व्यय का लेखा

जोखा तैयार किया जाता है।

Q.6 सरकारी बजट में राजस्व प्राप्तियां क्या होती है?

राजस्व या आगम प्राप्तियों में सरकार को कर राजस्व और गैर कर राजस्व मदो से प्राप्त होने वाली आय को शामिल किया जाता है ।

अन्य शब्दों में राजस्व प्राप्तियां को दो भागों में विभाजित किया जाता है।

 कर राजस्व तथा गैर कर राजस्व।

Q.7 कर की परिभाषा दीजिए।

डाल्टन के अनुसार - "कर लोकसत्ता द्वारा लगाया गया एक अनिवार्य अंशदान है ,जिसका कर के रुप में दी जाने वाली राशि के बदले उतनी ही मात्रा में लाभ प्राप्त करने से कोई संबंध नहीं और ना ही यह किसी गैर कानूनी कार्य का जुर्माना ही है।"

Q.8 प्रत्यक्ष कर कि परिभाषा दीजिए। दो उदाहरण दीजिए।

प्रत्यक्ष कर वहां पर है जो जिस व्यक्ति पर लगाया जाता है वह व्यक्ति ही उसका भार उठाता है , इस कर को टाला नहीं जा सकता है ना ही इसका भार आंशिक या पूर्ण रूप में किसे अन्य व्यक्ति पर हस्तांतरित किया जा सकता है।

 दूसरे शब्दों में जब किसी कर का कराघात और करापात  एक ही व्यक्ति पर पड़ता है।  तब यह कर प्रत्यक्ष कर कहलाता है।

प्रत्यक्ष कर का उधारण-  आयकर , निगम कर , संपत्ति कर है।

Q.9 अप्रत्यक्ष कर की परिभाषा दीजिए । अप्रत्यक्ष करके दो उदाहरण बताइए।

अप्रत्यक्ष या परोक्ष कर -  जो कर किसी एक व्यक्ति पर लगाए जाए परंतु उनका भुगतान पूर्ण अथवा आंशिक रूप से दूसरे व्यक्ति करें , वे अप्रत्यक्ष या परोक्ष कर कहलाते हैं । अप्रत्यक्ष कर का भुगतान करने का दायित्व तथा कर का मौद्रिक भार भिन्न-भिन्न व्यक्तियों पर पड़ता है ।

उधारण के लिए - उत्पाद कर,  सीमा शुल्क,  अबकारी कर,  बिक्री कर , वस्तु एवं सेवा कर।

Q.10 अनुपातिक कर की परिभाषा दीजिए।

अनुपातिक कर वह कर है जिसमें सभी आय स्तरों पर एक ही दर से कर लगाया जाता है । अर्थात चाहे आय घटे या बढ़े परंतु कर कि दर एक समान रहती है।  इस प्रकार अनुपातिक कर कि दर निर्धन व्यक्तियों एवं धनी व्यक्तियों के लिए एक समान होती है।

Q.11 प्रगतिशील कर की परिभाषा दीजिए।

प्रगतिशील कर वह कर है जिसकी दर आय बढ़ने के

साथ बढ़ती जाती हैं,  प्रगतिशील कर में कम आय स्तर पर

कम दर से तथा अधिक आय दर से कर आरोपित किया जाता है।

Q.12 प्रतिगामी कर क्या है?

प्रतिगामी कर उस कर को कहते हैं जिसका भार अमीरों की अपेक्षा गरीबो पर अधिक पड़ता है , अर्थात जैसे जैसे कर योग्य आय बढ़ती जाती है कर कि दर बढ़ती जाती है।

Q.13 गैर कर राजस्व के दो स्रोत लिखिए। या उदाहरण

गेर कर आगम या राजस्व का आशय उस प्राप्ति से हैं जो सरकार को कर को छोड़कर अन्य साधनों से होती है उदाहरण के लिए ब्याज, लाभ तथा लाभांश शुल्क ,लाइसेंस शुल्क ,जुर्माना तथा दंड ,उपहार एवं अनुदान,

 ज़ब्ती आदि

Q.14 पूंजीगत प्राप्तियां सरकारी बजट में क्या होती है?

पूंजीगत प्राणियों अंतर्गत आय के उन समस्त स्त्रोतों को

रखा जाता है जिसका हमें बदले में भुगतान करना अवश्य होता है , लेकिन महत्वपूर्ण यहां है कि भुगतान उसी वित्तीय वर्ष में ना होकर आगामी किसी वित्तीय वर्ष में किए जाते हैं।  इसे पूंजी खाता नाम से जानते हैं,  इस प्रकार राजस्व प्राप्तियों की प्रकति जहां अल्प कालीन किस्म की होती है वहीं पूंजीगत प्राप्तियों  की प्रकति दिर्घकालीन होती हे।

Q.15 उधारी को पूंजीगत प्राप्तियों में क्यों शामिल किया जाता है?

पूंजीगत प्राप्तियों के अंतर्गत आय के उन समस्त

स्त्रोतों को रखा जाता है जिनका हमें बदले में भुगतान करना उससे होता लेकिन महत्वपूर्ण यह  है की भुगतान उसी वित्तीय वर्ष में ना होकर आगामी किसी वित्तीय वर्ष में किए जाते हैं।

अतः उधारी का भुगतान भी भविष्य में करना पड़ता है

इसलिए इसे पूंजीगत प्राप्तियों में शामिल किया जाता है।

Q.15 राजस्व व्यय क्या है ?

राजस्व व्यय से अभिप्राय सरकार द्वारा एक वित्तीय वर्ष में किए जाने वाले उस अनुमानित व्यय से है जिसके फलस्वरूप न तो सरकार की परिसंपत्ति का निर्माण होता है और नहीं देयता में कमी होती है।

उदाहरण के लिए सरकार द्वारा वृद्धावस्था पेंशन

,छात्रवृत्ति आदि साथ ही साथ ऋणों के भुगतान पर किए गए व्यय।

Q.16 राजस्व प्राप्तियों कि परिभाषा दीजिए।

वे प्राप्तियां जो ना तो देयताओं का निर्माण करती है और ना ही परिसंपत्तियों को कम करती हैं वे राजस्व प्राप्तियां कहलाती हैं उदाहरण के लिए कर, सार्वजनिक उद्योगों के शेयर का विक्रय आदि।

Q.17 राजकोषीय घाटे की परिभाषा दीजिए।

राजकोषीय घाटे का संबंध सरकार की राजस्व तथा पूंजीगत दोनों प्रकार के व्ययों तथा राजस्व और उधार छोड़कर बाकी पूंजीगत प्राप्तियां से हैं ।

राजकोषीय घाटा कुल व्यय ( राजस्व+ पूंजीगत) की

उधार छोड़कर कुल प्राप्तियों (राजस्व+ उधार छोड़कर पूंजीगत प्राप्तियों) पर अधिकता है।

Q.18 पूरक बजट किसे कहते हैं?

पूरक बजट - पूरक बजट वह बजट है जो किसी देश की सरकार के द्वारा युद्ध ,भूकंप , बाढ़ जैसे अल्पकालीन परिस्थितियों में संसद में प्रस्तुत किया जाता है । इस बजट के लिए कोई निश्चित समयावधि नहीं होती।

Q.19 प्राथमिक घाटा क्या होता है?

प्राथमिक घाटा राजकोषीय घाटे तथा भुगतान किए जाने

वाले ब्याज का अंतर है।

प्राथमिक घाटा या सकल प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा - ब्याज भुगतान

Q.20 योजनागत व्यय क्या है?

योजनागत व्यय उस व्यय को कहते हैं जो सरकार द्वारा देश के योजनाबद्ध विकास कार्यक्रम पर किया जाता है उदाहरण के लिए सिंचाई के लिए नहरों के निर्माण पर किए जाने वाला वह योजनागत व्यय है

Q.21 गैर योजनागत व्यय क्या है?

गैर योजना व्यय से अभिप्राय उस व्यय हैं जिसका योजनाओं में कोई प्रावधान नहीं किया जाता।

प्रत्येक योजना की समाप्ति पर उस योजना में शुरू किए गए कार्यक्रम की योजना की अवधि से बाहर आ जाते हैं । कार्यक्रमों के संपादन पर होने वाले चालू व्रतों को गैर योजना व्यय कहते हैं । इस तरह के व्यय की व्यवस्था प्रत्येक बजट में की जाती है।

Q.22 विकासात्मक  व्यय क्या है? दो उदाहरण दीजिए।

ऐसा व्यय जो देश के सामाजिक और आर्थिक विकास से सीधा संबंध रखता है विकासात्मक व्यय कहलाता है । कृषि, उद्योग ,शिक्षा ,स्वास्थ्य, सार्वजनिक कल्याण, वैज्ञानिक अनुसंधान आदि पर किया गया वह विकासात्मक वह कहलाता है।

Q.23 अंतरिम बजट किसे कहते हैं?

अंतरिम बजट को वोट ऑन अकाउंट कहा जाता है । इसे लेखानुदान मांग और मिनी बजट भी कहते हैं। वोट ऑन अकाउंट के द्वारा सीमित अवधि के लिए केंद्र सरकार के आवश्यक खर्चों को स्वीकृति दी जाती है । जिस वर्ष लोकसभा का चुनाव होता है उस वर्ष सरकार अंतरिम बजट

प्रस्तुत करती है।  चुनाव के बाद नई सरकार पूर्ण बजट प्रस्तुत करती है।

Q.24 राजकोषीय घाटे का क्या महत्व है?

राजकोषीय घाटे का महत्व - राजकोषीय घाटा अर्थव्यवस्था को दिशा निर्देश प्रदान करने के रूप में एक उपयोगी उपकरण हो सकता है क्योंकि -

1. इसकी सहायता से अर्थव्यवस्था में पूंजीगत व्यय की राशि में वृद्धि संभव हो पाती है ।

2.सरकार अपने व्ययों की आपूर्ति के लिए अधिक वित्तीय संसाधन जुटा पाती है।

Q.25 कर क्या है इसकी विशेषताएं लिखिए?

कर का अर्थ - कर प्राप्तियां वे प्राप्तियां हैं जो सरकार कर तथा शुल्क लगाकर अर्जित करती हैं

कर की विशेषताएं-

1. पर एक अनिवार्य अंशदान है ।

2. कर से होने वाली आय का उपयोग सामान्य हित के लिए किया जाता है ।

3. सरकार करदाता को कर के बदले में कोई विशेष लाभ नहीं प्रदान करती।

4. कर वस्तुओं तथा संपत्ति पर लगाया जाता है परंतु इसका भुगतान व्यक्ति ही करते हैं यह उनका निजी कर्तव्य माना जाता है।

5. करो में करदाता को त्याग करना पड़ता है ,किंतु यह प्रतिफल रहित त्याग है । कर सेवा का लागत मूल्य नहीं है।

6. करारोपण वैधानिक सत्ता पर आधारित और निर्धारित होता है।

 

Q.26 प्रत्यक्ष कर एवं अप्रत्यक्ष कर में अंतर बताइए।

प्रत्यक्ष कर

अप्रत्यक्ष कर

1. वह कर जो आय एवं संपत्ति पर लगाए जाते हैं प्रत्यक्ष कर कहलाते हैं।

 

वे कर जो वस्तुओं एवं सेवाओं पर लगाए जाते हैं अप्रत्यक्ष कर कहलाते हैं

 

2. इन करो का भार उसी व्यक्ति पर पड़ता है जिन पर यह लगाया जाता है।

 

अप्रत्यक्ष करों का भार दूसरों पर डाला जा सकता है।

 

3. कर का भार धनी को पर अधिक एवं निर्धनों पर कम पड़ता है यह कर प्रगतिशील कहलाते हैं आय के बढ़ने से इनकी दर भी बढ़ जाती है।

 

अप्रत्यक्ष करों का प्रभाव निर्धनों एवं धनी को पर एक जैसा पड़ता है यह कर अनुपाती होते हैं।

 

4. आयकर, मृत्यु कर ,निगम कर, संपत्ति कर ,उपहार कर,  व्यवसाय कर, प्रत्यक्ष करों में शामिल होते हैं।

 

बिक्री कर, सीमा शुल्क, उत्पाद कर ,टोल कर, सेवा कर, मूल्य संवर्धित कर ,वस्तु एवं सेवा कर अप्रत्यक्ष कर है।

 

 

Q.27 सरकारी बजट का क्या महत्व है ?समझाइए।

बजट के महत्वपूर्ण बिंदुओं से जाना जा सकता है-

1. आर्थिक नियंत्रण - बजट सरकार के विभिन्न विभागों के आय- व्यय को नियंत्रित करता है।

2. आर्थिक स्थिरता - आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार मंदी में घाटे का बजट एवं तेजी में अधिक्य का बजट बनाकर अपने उद्देश्य की पूर्ति करती है।

3. अधिकारियों के कार्य क्षेत्र का निर्धारण - बजट द्वारा सभी अधिकारियों के कार्य क्षेत्र की सीमा निर्धारित कर दी जाती है ताकि वे उत्तरदायित्व का उचित निर्वहन कर जनता का आर्थिक कल्याण कर सके।

4. सार्वजनिक उपक्रमों से लाभ - बजट में सार्वजनिक उपक्रमों के लाभ हानि का ब्यौरा भी होता है जिससे जानकारी मिलती है कि कितने उद्योग लाभ और कितने हानि में चल रहे हैं।

5. विदेशी विनिमय - बजट में विदेशी मुद्रा भंडार में ऋण पर ब्याज , विदेशी निवेश एवं विनिमय दर के साथ विनिमय दशाओं का भी उल्लेख होता है जिससे इसके संबंध में ज्ञान प्राप्त होता है।

6. कर और गैर कर साधनों में समन्वय- सरकार बजट के माध्यम से कर आय और गैर कर आय साधनों में समन्वय स्थापित करती हैं।

7. शासकीय नीतियों का ज्ञान-  बजट से सरकारी नीतियों की जानकारी प्राप्त होती है सरकार की राजकोषीय, मौद्रिक, औद्योगिक एवं व्यापारिक नीति का ज्ञान होता है।

Q.28 राजस्व घाटे तथा वित्तीय घाटे में अंतर समझाइए।

राजस्व घाटा

वित्तीय घाटा

1. जब राजस्व भू राजस्व आय से अधिक हो तो यह अधिक्य की स्थिति राजस्व घाटा कहलाती हैं।

 

जब कुल व्यय प्राप्तियों की राशि से अधिक हो तो यह अधिक्य की स्थिति वित्तीय घटा कहलाती है। ध्यान रहे वह में उधारी की राशि शामिल नहीं रहती।

 

जब कुल व्यय प्राप्तियों की राशि से अधिक हो तो यह अधिक्य की स्थिति वित्तीय घटा कहलाती है। ध्यान रहे वह में उधारी की राशि शामिल नहीं रहती।

 

वित्तीय घाटा यह दर्शाता है कि सरकार को कितनी राशि उधारी के रूप में लेने से उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकेगी।

 

Q. 29 प्राथमिक घाटे तथा वित्तीय घाटे में अंतर स्पष्ट कीजिए।

प्राथमिक घाटा

वित्तीय घाटा

1. यह वित्तीय घाटे तथा ब्याज के भुगतान का अंतर होता है।

 

यह कुल व्यय का कुल प्राप्तियों पर अधिक्य है कुल प्राप्ति ओं में उधारी शामिल नहीं होती।

 

2. यह इस बात का संकेत है कि सरकार को ब्याज की राशि छोड़कर कितनी राशि उधार लेना आवश्यक है।

 

यह इस बात का संकेत है कि ब्याज सहित सरकार की कितनी राशि उधार लेने इससे उसकी आवश्यकताएं पूरी हो जाएगी।

 

3. प्राथमिक घाटा = वित्तीय घाटा - ब्याज का भुगतान

 

वित्तीय घाटा = कुल व्यय - कुल प्राप्तियां ( उधारी की रकम छोड़कर)

 

Q.30 राजस्व प्राप्तियों तथा पूंजीगत प्राप्तियों में अंतर समझाइए।

राजस्व प्राप्तियां

पूंजीगत प्राप्तियां

1. राजस्व प्राप्तियां सरकार की ना तो देयता उत्पन्न होती है और ना ही परिसंपत्तियों में वृद्धि होती है।

 

पूंजीगत प्राप्तियां सरकार की देयता उत्पन्न करती है एवं परिसंपत्तियों में कमी करती हैं।

 

2. कर, शुल्क ,चालान, जुर्माने से प्राप्त आय राजस्व प्राप्ति ओं में शामिल होती है।

 

ऋण प्राप्त करना देयताओं को बढ़ाता है एवं विनिवेशीकरण सरकारी परिसंपत्तियों में कमी करता है।

 

3. यह आवृत्ति की स्वभाव की होती है बारंबार प्राप्त होती है इनकी पुनरावृत्ति अधिक होती है।

 

यह अनावृति स्वभाव की होती है अर्थात इनको पुनरावृत्ति नहीं होती।

 

Q.31 राजस्व व्यय तथा पूंजीगत व्यय में क्या भेद है? समझाइए।

राजस्व व्यय

पूंजीगत व्यय

1. राजस्व व्ययों का स्वभाव आवृत्ति होता है यह यह बार-बार किए जाते हैं।

 

पूंजीगत मदों का स्वभाव अनावृत्ति होता है यह बार-बार नहीं किए जाते।

 

2. इसमें प्रतिरक्षा ,नागरिक प्रशासन ,लोक स्वास्थ्य एवं शिक्षा की मदें शामिल होती है।

 

पूंजीगत व्यय में भवन एवं बांध निर्माण , मशीनों की स्थापना आदि आते हैं।

 

3. यह वह गैर विकासात्मक वह कहलाते हैं।

 

यह व्यय विकासात्मक वह कहलाते हैं।

 

4. यह व्यय अल्पकालीन होते हैं।

 

यह व्यय दीर्घकालीन होते हैं।

 

 

Q.32 बजट की विशेषताएं लिखिए। या

नियोजित अर्थव्यवस्था में बजट की विशेषताएं लिखिए।

नियोजित अर्थव्यवस्था में बजट की विशेषताएं

1. नियोजित अर्थव्यवस्था में बजट राष्ट्रीय नियोजन के वृहद उद्देश्य पर आधारित होता है।

2. नियोजन के प्रारंभिक काल में देश के आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर प्रायः घाटे का बजट बनाया जाता है तथा बाद में बजट को धीरे-धीरे संतुलित करने का प्रयास किया जाता है।

3. नियोजित अर्थव्यवस्था में बजट का निर्माण इस तरह किया जाता है कि कर का प्रभाव अधिकाधिक न्याय पूर्ण रहे इसके लिए प्रगतिशील कर की नीति अपनाई जाती है।

4. देश की आर्थिक क्रियाओं के निष्पादन में बजट की भूमिका सकारात्मक होती है।

Q.33 प्रत्यक्ष कर के लाभों का वर्णन कीजिए।

प्रत्यक्ष करों के गुण या लाभ निम्नलिखित हैं-

1. न्यायपूर्ण - प्रत्यक्ष कर न्यायपूर्ण होते हैं क्योंकि यह व्यक्तिगत आय क्षमताओं के आधार पर लगाए जाते हैं।

2. प्रगतिशील - करदाता की आय अधिक होने पर कर की दर भी बढ़ती जाती है प्रगतिशील पर आए क्या समानता को कम करते हैं।

3. निश्चित -  इन करो में अनिश्चितता का गुण पाया जाता है क्योंकि करदाता को कब कितना कहां कैसे कर जमा करना है।

4. लोतशील - में कर लोचपूर्ण होत